
देहरादून: प्रदेश में शिक्षकों के बीच पदोन्नति परीक्षा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रधानाचार्य सीमित विभागीय पदोन्नति परीक्षा समर्थक मंच ने राजकीय शिक्षक संघ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मंच का कहना है कि संघ की वर्तमान कार्यकारिणी अवैध है और उसके द्वारा लिए गए निर्णय किसी भी तरह से मान्य नहीं हैं। मंच ने मांग की है कि राजकीय शिक्षक संघ की नई प्रांतीय कार्यकारिणी के चुनाव शीघ्र कराए जाएं।
पदोन्नति परीक्षा में गड़बड़ी पर शिक्षा मंत्री आवास का घेराव करने की चेतावनी
मंच के प्रांतीय संयोजक बृजेश पंवार ने कहा कि यदि प्रधानाचार्य विभागीय पदोन्नति परीक्षा में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की जाती है, तो मंच के सदस्य हजारों अभिभावकों और विद्यार्थियों के साथ मिलकर शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव करेंगे। उन्होंने बताया कि मंच की ओर से महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा को पत्र लिखकर विशेष यूटीईटी परीक्षा शीघ्र कराने की मांग भी की जाएगी।
हड़ताल को बताया भ्रामक
मंच के प्रांतीय उपाध्यक्ष अनिल राणा ने कहा कि जब राजकीय शिक्षक संघ ने उच्च न्यायालय में यह हलफनामा दिया है कि वे हड़ताल पर नहीं हैं, तो फिर उनका हड़ताल का आह्वान पूरी तरह भ्रामक और अनुचित है। उन्होंने विभाग से मांग की कि हड़ताल में शामिल शिक्षकों की फोटो और वीडियोग्राफी कराई जाए ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
10 वर्षों में 30 लाख विद्यार्थी होंगे लाभान्वित
प्रांतीय महासचिव डॉ. कमलेश कुमार मिश्र ने बताया कि पदोन्नति परीक्षा से अगले दस वर्षों में 30 लाख से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि यह परीक्षा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
ईगास पर्व न मनाने पर उठाए सवाल
बृजेश पंवार ने यह भी कहा कि राजकीय शिक्षक संघ द्वारा परीक्षा का विरोध करते हुए ईगास पर्व न मनाने का निर्णय अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ईगास हमारी लोक आस्था और संस्कृति का प्रतीक है, और इसे न मनाना असंवेदनशीलता का परिचायक है।







