
देहरादून — सहस्रधारा रोड स्थित धनौला गांव में सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद गोल्डन फॉरेस्ट और नदी किनारे सरकारी जमीन की कथित अवैध बिक्री के मामले में स्थानीय न्यायालय ने शुक्रवार को सख्त रुख अपनाया। तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट साहिस्ता बानों ने राजपुर पुलिस को तुरंत मुकदमा दर्ज करके गहन विवेचना का निर्देश दिया है।
शिकायतकर्ता शाकुल उनियाल ने अदालत में कहा कि धनौला गांव में कूट रचित दस्तावेजों के ज़रिये आम लोगों को गोल्डन फॉरेस्ट तथा नदी की भूमि बेची जा रही है। उन्होंने यह मामला सबसे पहले 1 फरवरी 2021 को जिलाधिकारी व आयुक्त गढ़वाल को सौंपा था और बाद में उपजिलाधिकारी (सदर) को भी शिकायत दी, परन्तु उनकी शिकायतों पर किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई न होने का आरोप लगाया गया।
प्रशासन की ओर से एसआईटी (भूमि) को जांच के आदेश दिए जाने पर एसआईटी ने जांच कर शिकायत को सही माना। इसके परिणामस्वरूप 12 अप्रैल 2024 को तत्कालीन महानिरीक्षक निबंधन संदीप श्रीवास्तव को फर्जीवाड़े की FIR दर्ज कराने का निर्देश दिया गया था। यद्यपि एसआईटी की संस्तुति के बावजूद तीन माह तक मामला दबा रहा — और बाद में 2 जुलाई 2024 को महानिरीक्षक निबंधन ने एसएसपी देहरादून को जांच की संस्तुति भेजी, परंतु शिकायतकर्ता के अनुसार तब भी FIR दर्ज नहीं कराई गई।
शिकायतकर्ता ने अदालत में बताया कि पुलिस ने उनके खिलाफ एक मुकदमा दर्ज कर दिया, और वे बिटते 27 अगस्त को भी फिर से शिकायत लेकर गए। अंततः उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(3) के तहत याचिका दायर कर पुलिस जांच का आदेश मांगा, जिस पर अदालत ने कार्रवाई का आदेश दिया।
पुलिस ने अदालत में अपनी जवाब-तलब रिपोर्ट में कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट में कुछ आरोपियों — भरत सिंह नेगी, प्रशांत डोभाल, राजीव तलवार, मनोरमा डोभाल और नीरू तलवार — के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की संस्तुति की गई थी। पर रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उन संस्तुतियों पर अब तक क्या कार्यवाही हुई। पुलिस ने याचिकाकर्ता शाकुल का इस प्रकरण से कोई संबंध न बताकर उनकी शिकायत पर कार्रवाई न करने की दलील भी दी।
न्यायालय ने अपने निर्देश में स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के सैद्धांतिक निर्देशों के अनुसार केवल पीड़ित व्यक्ति ही शिकायत दर्ज कराने का अधिकार नहीं रखता; अपराध की जानकारी रखने वाला कोई भी नागरिक शिकायत कर सकता है। इसी आधार पर न्यायालय ने शाकुल की याचिका को स्वीकार कर संबंधित धाराओं में संज्ञेय अपराध के तहत मुकदमा दर्ज कर गहन विवेचना का आदेश दिया।
एसएसपी देहरादून अजय सिंह ने कहा कि एसआईटी की संस्तुति के आधार पर कुछ मामलों में मुकदमे दर्ज कर जांच पूरी की जा चुकी है और फाइनल रिपोर्ट भी पेश की जा चुकी है। परंतु मौजूदा याचिका में जिन तथ्यों की न्यायालय ने गहन विवेचना के लिए कहा है, उन पर अब अदालत के निर्देशानुसार और विस्तार से जाँच की जाएगी।







