
देहरादून: उत्तराखंड की शीतकालीन चारधाम यात्रा के दौरान गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) ने तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को बड़ा तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जीएमवीएन के निदेशक प्रत्यूष सिंह ने 21 अक्टूबर 2025 को आदेश जारी कर उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में यात्रियों को निगम के होटलों में आवास और भोजन पर 50% की छूट देने की घोषणा की। यह छूट शीतकालीन चारधाम यात्रा के दौरान लागू होगी, जिससे तीर्थयात्रियों को सस्ती और सुगम सुविधाएं मिलेंगी।
शीतकालीन चारधाम यात्रा: पूजा स्थल
शीतकाल में चारधाम के कपाट बंद होने के बाद पूजा-अर्चना निम्नलिखित स्थानों पर होती है:
- उत्तरकाशी जिला:
- खरसाली गांव: मां यमुना की पूजा-अर्चना।
- मुखवा गांव: मां गंगा की पूजा-अर्चना।
- रुद्रप्रयाग जिला:
- ऊखीमठ (ओंकारेश्वर मंदिर): बाबा केदारनाथ की शीतकालीन पूजा।
- चमोली जिला:
- ज्योर्तिमठ (नृसिंह मंदिर): आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी की पूजा।
- पाण्डूकेश्वर: बदरीनाथ जी की पूजा-अर्चना।
जीएमवीएन की सुविधाएं और छूट
जीएमवीएन शीतकालीन चारधाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए आवास और भोजन की व्यवस्था करता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के लिए उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में निगम के होटलों की वर्तमान आवासीय दरों पर 50% की छूट दी जाएगी।
प्रत्यूष सिंह, निदेशक, जीएमवीएन, “शीतकालीन चारधाम यात्रा को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली में यात्रियों को 50% किराया छूट दी जाएगी। यह सुविधा तीर्थयात्रियों को सस्ता और सुगम आवास प्रदान करेगी।”
शीतकालीन यात्रा का महत्व
शीतकालीन चारधाम यात्रा उत्तराखंड की आध्यात्मिक और पर्यटन क्षमता को बढ़ाने का एक अनूठा अवसर है। मुखवा, खरसाली, ऊखीमठ, ज्योर्तिमठ और पाण्डूकेश्वर जैसे स्थान न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि बर्फबारी और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों को भी आकर्षित करते हैं। इस छूट से अधिक संख्या में यात्री इन स्थानों की ओर आकर्षित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।







