
यमकेश्वर: उत्तराखंड के यमकेश्वर विकासखंड के जुड्डा गांव में 19 अक्टूबर 2025 को भालू के हमले में घायल हुई मेघा भंडारी को एम्स अस्पताल से 21 अक्टूबर को छुट्टी मिल गई है। घटना के बाद से लालढांग रेंज के वन कर्मचारी गांव में गश्त कर रहे हैं और ग्रामीणों को पैदल रास्तों पर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वन विभाग ने घायल महिला को तत्काल 5,000 रुपये की सहायता राशि दी है, और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
भालू का हमला: मेघा भंडारी की स्थिति
19 अक्टूबर को मेघा भंडारी अपने घर से करीब 500 मीटर दूर घास काटने गई थीं। घास काटते समय झाड़ियों में छिपे एक भालू ने अचानक उन पर हमला कर दिया, जिससे उनके सिर में चोटें आईं। ग्रामीणों ने तुरंत उन्हें एम्स अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज हुआ। 21 अक्टूबर को उनकी स्थिति स्थिर होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई।
घटना के दौरान मेघा की सास, सुंदरी देवी, ने साहस दिखाते हुए उन्हें बचाने की कोशिश की। वन क्षेत्राधिकारी लालढांग रेंजर अनुराग जोशी ने सुंदरी देवी के इस साहस की सराहना की और इसे ग्रामीणों के लिए प्रेरणा बताया।
वन विभाग की कार्रवाई
लालढांग रेंज के वन कर्मचारी पंकज कुमार ने बताया कि घटना के बाद से गांव में लगातार गश्त की जा रही है, लेकिन भालू दोबारा दिखाई नहीं दिया। ग्रामीणों को जंगल के रास्तों पर अकेले न जाने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वन विभाग ने भालू की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अतिरिक्त निगरानी बढ़ा दी है।
अनुराग जोशी, रेंजर, “मेघा को बचाने में उनकी सास सुंदरी देवी का साहस प्रेरणादायक है। हम घायल महिला को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं। फिलहाल 5,000 रुपये की सहायता दी गई है।”
ग्रामीणों के लिए सलाह और मुआवजा
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल क्षेत्रों में सतर्क रहें, खासकर सुबह और शाम के समय। साथ ही, समूह में चलने और शोर करने की सलाह दी गई है ताकि वन्यजीव दूर रहें। मेघा भंडारी को मुआवजे के लिए औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और तत्काल राहत के रूप में 5,000 रुपये प्रदान किए गए हैं।






