
देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सीमांत क्षेत्र विकास परिषद के गठन की घोषणा की है। इसके साथ ही, उन्होंने देहरादून में देश के पांचवें विज्ञान शहर की स्थापना की घोषणा की, जो उत्तराखंड के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह घोषणा 15 अक्टूबर को रुद्रप्रयाग के गुप्तकाशी में आयोजित चौथे सीमांत पर्वतीय बाल विज्ञान महोत्सव के उद्घाटन समारोह के दौरान की गई। इस अवसर पर सीएम धामी ने बाल वैज्ञानिकों से जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन और जल संरक्षण जैसे मुद्दों पर चर्चा की और नवाचार को बढ़ावा देने का वादा किया।
सीमांत क्षेत्र विकास परिषद: बुनियादी ढांचे पर जोर
रुद्रप्रयाग के पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय, बणसू जाखधार (गुप्तकाशी) में आयोजित समारोह में सीएम धामी ने कहा कि सीमांत क्षेत्र विकास परिषद का गठन उत्तराखंड के सीमांत जिलों में विकास को गति देने के लिए किया जा रहा है। इस परिषद का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य, शिक्षा, और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले हमारे लोग कठिन परिस्थितियों में जीवनयापन करते हैं। उनकी सुविधाओं और अवसरों को बढ़ाने के लिए यह परिषद काम करेगी। हम नवाचार केंद्र स्थापित करेंगे, जो स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए तकनीकी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएंगे।” उन्होंने महानिदेशक, यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत को परिषद के गठन और कार्यान्वयन के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए।
देहरादून में विज्ञान शहर: नवाचार का नया केंद्र
सीएम धामी ने अपने संबोधन में देहरादून में देश के पांचवें विज्ञान शहर की स्थापना की घोषणा की। यह विज्ञान शहर उत्तराखंड के युवाओं को अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए अवसर प्रदान करेगा। सीएम धामी ने कहा, “देहरादून में विज्ञान शहर की स्थापना उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है। यह हमारे युवा वैज्ञानिकों को विश्वस्तरीय मंच प्रदान करेगा और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में मदद करेगा।”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में भारत नवाचार और अनुसंधान में नई ऊंचाइयां छू रहा है। उत्तराखंड भी इस दिशा में पीछे नहीं रहेगा।” विज्ञान शहर में जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संरक्षण, और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर शोध को प्राथमिकता दी जाएगी।
बाल वैज्ञानिकों से संवाद: जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन पर चर्चा
महोत्सव में विभिन्न जिलों से आए बाल वैज्ञानिकों ने सीएम धामी के साथ जलवायु परिवर्तन, जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन, और विज्ञान व प्रौद्योगिकी जैसे विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने बच्चों की शंकाओं का समाधान किया और उनके नवाचारों की सराहना की। एक बाल वैज्ञानिक, अंजलि रावत ने कहा, “सीएम सर ने हमारी बातें ध्यान से सुनीं और हमें प्रोत्साहित किया। यह हमारे लिए बहुत बड़ा मौका है।”
सीएम धामी ने बाल वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा, “आप हमारे भविष्य के वैज्ञानिक हैं। आपकी सोच और नवाचार उत्तराखंड को नई दिशा देंगे। हम आपके लिए हर संभव अवसर प्रदान करेंगे।” उन्होंने यह भी वादा किया कि सीमांत जिलों के बच्चों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।
यूकॉस्ट डैशबोर्ड पुस्तक का विमोचन
समारोह के दौरान सीएम धामी ने यूकॉस्ट की रुद्रप्रयाग डैशबोर्ड पुस्तक का विमोचन किया। यह जीआईएस आधारित रिमोट सिस्टम डैशबोर्ड विभिन्न विभागों की योजनाओं की जानकारी को एक मंच पर उपलब्ध कराता है। इस डैशबोर्ड से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और सीमांत क्षेत्रों में विकास योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा। प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा, “यह डैशबोर्ड तकनीक और प्रशासन का एक अनूठा संगम है, जो नीति निर्माण में मदद करेगा।”
उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों की चुनौतियां
उत्तराखंड के सीमांत जिले जैसे चमोली, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, और रुद्रप्रयाग प्राकृतिक आपदाओं, सीमित बुनियादी ढांचे, और स्वास्थ्य-शिक्षा सेवाओं की कमी से जूझ रहे हैं। 2024 के आंकड़ों के अनुसार, इन क्षेत्रों में सड़क घनत्व मात्र 0.8 किमी प्रति वर्ग किमी है, और प्रति 10,000 लोगों पर केवल 2.3 डॉक्टर उपलब्ध हैं। सीमांत क्षेत्र विकास परिषद इन समस्याओं को हल करने के लिए तकनीकी और सामुदायिक दृष्टिकोण अपनाएगी।
विकास और नवाचार की नई राह
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इन घोषणाओं ने उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों के लिए नई उम्मीद जगाई है। सीमांत क्षेत्र विकास परिषद और विज्ञान शहर जैसे कदम न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेंगे, बल्कि युवाओं को नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में अवसर भी प्रदान करेंगे। यह पहल उत्तराखंड को आत्मनिर्भर भारत के सपने के करीब ले जाएगी।
सीएम धामी ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड के हर कोने में विकास की रोशनी पहुंचे। सीमांत क्षेत्रों के लोग हमारी प्राथमिकता हैं।” अब जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि ये योजनाएं कितनी जल्दी धरातल पर उतरती हैं। क्या उत्तराखंड का विज्ञान शहर और सीमांत परिषद राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे? यह समय बताएगा।







