
देहरादून: जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संकट के दौर में उत्तराखंड ने नवीकरणीय स्रोतों की खोज में एक बड़ा कदम उठाया है। उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) चमोली जिले के टपोवन क्षेत्र में भू-तापीय (जियोथर्मल) ऊर्जा उत्पादन के लिए ड्रिलिंग शुरू करेगा। इस महत्वाकांक्षी प्रस्ताव को निगम की 130वीं बोर्ड बैठक में मंजूरी मिल गई। यह कदम राज्य को कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। आइसलैंड की विशेषज्ञ टीम की रिपोर्ट के आधार पर होने वाली इस ड्रिलिंग से उत्तराखंड के 40 से अधिक भू-तापीय साइट्स का व्यावसायिक उपयोग संभव हो सकेगा।
बोर्ड बैठक में मंजूरी: मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बड़े फैसले
बुधवार को देहरादून में आयोजित यूजेवीएनएल की 130वीं बोर्ड बैठक मुख्य सचिव और निगम अध्यक्ष आनंद बर्धन की अध्यक्षता में हुई। बैठक में भू-तापीय ऊर्जा परियोजना के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। इससे पहले, आइसलैंड की विशेषज्ञ टीम ने टपोवन क्षेत्र में उच्च तापमान वाले हॉट स्प्रिंग्स की क्षमता का आकलन किया था। रिपोर्ट में पाया गया कि यहां की भूगर्भीय संरचना बिजली उत्पादन के लिए आदर्श है, जो राज्य के कुल 20,000 मेगावाट हाइड्रो पोटेंशियल के साथ मिलकर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी।
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने बैठक में कहा, “उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति हिमालयी हॉट स्प्रिंग्स के लिए अनुकूल है। टपोवन जैसे क्षेत्रों में भू-तापीय ऊर्जा से हम न केवल कार्बन उत्सर्जन कम करेंगे, बल्कि स्थानीय रोजगार भी पैदा करेंगे। यह नीति 2025 के तहत राज्य सरकार का एक क्रांतिकारी कदम है।” बर्धन ने यूजेवीएनएल को ड्रिलिंग कार्य के लिए शीघ्र टेंडर जारी करने और पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
टपोवन का महत्व: 40 साइट्स में से एक, आइसलैंड रिपोर्ट पर आधारित ड्रिलिंग
टपोवन, जो बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे तीर्थ स्थलों के निकट स्थित है, उत्तराखंड के 40 भू-तापीय साइट्स में से एक प्रमुख केंद्र है। आइसलैंड टीम की 2024 की रिपोर्ट में कहा गया कि यहां की गर्म प्राकृतिक झरनों से 5-10 मेगावाट बिजली उत्पादन संभव है। यह तकनीक, जो आइसलैंड जैसे देशों में सफल रही है, उत्तराखंड में हिमालयी भूगर्भीय गतिविधियों का फायदा उठाएगी। ड्रिलिंग से भूमिगत गर्म पानी को ऊर्जा में बदलने की क्षमता का परीक्षण होगा, जो बिजली उत्पादन, हीटिंग और वॉटर प्यूरीफिकेशन में उपयोगी साबित हो सकता है।
उत्तराखंड सरकार की भू-तापीय ऊर्जा नीति 2025 के तहत, ऊर्जा विभाग, यूआरईडीए (उत्तराखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी) और यूजेवीएनएल मिलकर इस नीति को लागू करेंगे। नीति में 30 वर्षीय प्रोजेक्ट लीज, प्रतिस्पर्धी बोली और पर्यावरणीय सुरक्षा पर जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि टपोवन प्रोजेक्ट सफल रहा, तो राज्य में यमुनोत्री, गौरीकुंड और अन्य साइट्स पर विस्तार संभव होगा। हालांकि, हिमालयी पारिस्थिता की नाजुकता को देखते हुए, भूकंप, भूजल प्रदूषण और भूमि धंसाव जैसे जोखिमों पर सतर्कता बरतनी होगी।
अन्य महत्वपूर्ण निर्णय: धरासू टरबाइन और त्यूनी-प्लासू परियोजना को मंजूरी
बैठक में भू-तापीय प्रस्ताव के अलावा कई अन्य फैसले भी लिए गए। धरासू विद्युत गृह की 76 मेगावाट क्षमता वाली टरबाइन के विभिन्न कार्यों और अतिरिक्त उपकरणों की खरीद को स्वीकृति मिली। यह परियोजना उत्तराखंड की कुल 4,269 मेगावाट स्थापित क्षमता में महत्वपूर्ण योगदान देगी। इसके साथ ही, वित्तीय वर्ष 2024 के वार्षिक लेखों को बोर्ड ने मंजूरी दे दी, जो निगम की वित्तीय स्थिरता को दर्शाता है।
त्यूनी-प्लासू जल विद्युत परियोजना (72 मेगावाट) के सिविल, हाइड्रो-मैकेनिकल और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल कार्यों की अद्यतन अनुमानित लागत (अपडेटेड एस्टीमेट कॉस्ट) की संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति भी प्रदान की गई। यह परियोजना देहरादून जिले में स्थित है और राज्य की हाइड्रो क्षमता को मजबूत करेगी। मुख्य सचिव ने कहा, “ये निर्णय न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ाएंगे, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देंगे।”
वित्तीय फैसले: लाभांश और प्रोत्साहन राशि
बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए राज्य सरकार को 11.04 करोड़ रुपये का लाभांश देने का प्रस्ताव मंजूर हुआ। इसके अलावा, निगम कर्मियों को वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के लिए कार्य निष्पादन आधारित प्रोत्साहन राशि देने पर सहमति बनी। यह कदम कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाएगा और उत्पादकता में सुधार लाएगा। यूजेवीएनएल, जो राज्य में 1,441 मेगावाट हाइड्रो क्षमता का संचालन करती है, ने वित्तीय वर्ष 2024 में 5,400 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन किया, जो औसतन 2.25 रुपये प्रति यूनिट की लागत पर उपलब्ध हुई।
नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में उत्तराखंड का कदम
उत्तराखंड, जहां हाइड्रो पावर राज्य की अर्थव्यवस्था का दूसरा सबसे बड़ा स्तंभ है, अब भू-तापीय ऊर्जा में कदम रखकर विविधीकरण की ओर अग्रसर हो रहा है। राज्य कैबिनेट द्वारा जुलाई 2025 में मंजूर भू-तापीय ऊर्जा नीति 2025 के तहत, ऊर्जा विभाग यूआरईडीए और यूजेवीएनएल के साथ मिलकर 40 साइट्स पर अन्वेषण करेगा। टपोवन प्रोजेक्ट एक पायलट के रूप में काम आएगा, जहां 5-10 मेगावाट उत्पादन संभव है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नीति राज्य को वैश्विक स्तर पर स्थायी ऊर्जा मानचित्र पर स्थापित करेगी, लेकिन पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी अनिवार्य होगी।
स्वच्छ ऊर्जा का भविष्य
यूजेवीएनएल की बोर्ड बैठक ने न केवल भू-तापीय ऊर्जा की राह खोली है, बल्कि हाइड्रो परियोजनाओं को गति भी दी है। टपोवन ड्रिलिंग से उत्तराखंड नवीकरणीय ऊर्जा में नया अध्याय लिखेगा। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने कहा, “यह कदम जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने और स्थानीय विकास को बढ़ावा देने में सहायक होगा।” राज्य सरकार से उम्मीद है कि पर्यावरणीय सुरक्षा के साथ इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि उत्तराखंड ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों को छुए।





