
मसूरी: उत्तराखंड के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के लिए सरकार ने अक्टूबर तक का वेतन जारी कर दिया है, लेकिन मसूरी के एमपीजी कॉलेज के शिक्षकों और कर्मचारियों को अभी तक सैलरी नहीं मिली। दिवाली से पहले वेतन में देरी से कर्मचारी गहरे आक्रोश में हैं और आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। कर्मचारियों ने समय पर भुगतान न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। उधर, प्राचार्य ने प्रशासनिक अड़चनों का हवाला दिया है। इस बीच, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून मेडिकल कॉलेज में 1,456 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे, जिससे कर्मचारियों में सैलरी देरी को लेकर और निराशा बढ़ी है।
सैलरी देरी का कारण: प्रशासनिक अड़चनें
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल सिंह चौहान ने बताया कि यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार के अवकाश पर होने के कारण वेतन जारी करने में देरी हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि औपचारिकताएं पूरी होते ही सैलरी जल्द उपलब्ध कराई जाएगी।
हालांकि, कर्मचारी इस तर्क से संतुष्ट नहीं हैं। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “जब शासन ने बजट जारी कर दिया और अन्य कॉलेजों में सैलरी पहुंच गई, तो केवल MPG कॉलेज में ही देरी क्यों? हर बार हमें वेतन के लिए संघर्ष करना पड़ता है। त्योहार का समय है, बच्चों की फीस और घर की जरूरतें रुकी हैं। प्रबंधन की लापरवाही से हमारी दिवाली अंधेरे में डूब गई।”
कर्मचारियों का आक्रोश: आंदोलन की चेतावनी
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि समय पर वेतन नहीं मिला, तो वे आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने प्रबंधन की लापरवाही और प्रशासनिक ढिलाई पर सवाल उठाए। कर्मचारियों का कहना है कि आर्थिक तंगी के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत सरकार ने अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के लिए 1.55 अरब रुपये से अधिक का बजट आवंटित किया था, जिसमें MPG कॉलेज को भी वेतन राशि मिली थी। लेकिन आंतरिक प्रशासनिक समस्याओं के कारण यह राशि कर्मचारियों तक नहीं पहुंची।
नियुक्ति पत्र वितरण और कर्मचारियों की निराशा
इसी दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून मेडिकल कॉलेज में 1,456 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे, जिनमें 109 समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी (UKPSC) और 1,347 सहायक अध्यापक (एलटी) (UKSSSC) शामिल हैं। इस आयोजन ने MPG कॉलेज कर्मचारियों की निराशा को और बढ़ा दिया, क्योंकि नए नियुक्तियां हो रही हैं, लेकिन मौजूदा कर्मचारियों को सैलरी नहीं मिल रही।
सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव
यह मामला अशासकीय कॉलेजों में प्रशासनिक लापरवाही और वेतन वितरण में देरी की समस्या को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी देरी कर्मचारियों के मनोबल और शैक्षिक संस्थानों की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि सरकार और यूनिवर्सिटी प्रशासन तत्काल कार्रवाई करे।
प्राचार्य ने कहा कि वे जल्द से जल्द वेतन जारी करने के लिए प्रयासरत हैं। कर्मचारियों ने सरकार से हस्तक्षेप और समयबद्ध भुगतान की मांग की है ताकि उनकी दिवाली खुशहाल हो सके।





