
हरिद्वार। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की परीक्षा में नकल कराने वाले मुख्य आरोपित खालिद को बुधवार को पुलिस टीम देहरादून से हरिद्वार लेकर पहुंची। यहां बहादरपुर जट गांव स्थित आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज में पुलिस ने पूरे घटनाक्रम का सीन रिक्रिएशन (Scene Recreation) कराया।
इस दौरान एसपी जया बलोनी की मौजूदगी में खालिद ने उसी तरह दीवार कूदकर दिखाया, जैसे वह परीक्षा के दिन अंदर घुसा था। पलक झपकते ही वह साढ़े पांच फीट ऊंची दीवार पार कर कमरा नंबर नौ तक पहुंच गया था।
कैसे हुआ था नकलकांड का खुलासा?
- पुलिस ने बताया कि आरोपित खालिद मोबाइल फोन लेकर परीक्षा केंद्र में घुसा।
- अंदर जाकर उसने प्रश्न पत्र की फोटो खींचकर अपनी बहन सबीहा को भेजी।
- पुलिस ने पहले ही सबीहा को गिरफ्तार कर लिया था।
- अब खालिद की गिरफ्तारी के बाद पूरी साजिश की परतें खुल रही हैं।
पुलिस जांच में क्या सामने आया?
पुलिस टीम ने कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया।
- पाया गया कि कॉलेज की दीवार लगभग 5.5 फीट ऊंची है।
- इसके बावजूद आरोपित बड़ी सफाई से अंदर कूदने में सफल रहा।
- पुलिस ने एक शिक्षक से पूछताछ कर उसका मोबाइल नंबर भी रिकॉर्ड किया।
इसके बाद पुलिस ने खालिद के घर, ज्वालापुर और रानीपुर की नहर पटरी तक उसका पूरा रास्ता ट्रेस किया। इसका उद्देश्य यह समझना था कि परीक्षा वाले दिन वह किन-किन रास्तों से होकर कॉलेज तक पहुंचा।
सुरक्षा चूक पर उठे सवाल
एक अधिकारी ने बताया कि यह रिक्रिएशन स्कूल की सुरक्षा खामियों को उजागर करने और भविष्य में कड़े सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित करने के लिए किया गया।
अब तक की जांच में पुलिस ने यह साफ कर लिया है कि –
- खालिद मोबाइल फोन लेकर परीक्षा केंद्र में कैसे पहुंचा।
- उसने अपनी बहन को पेपर कैसे भेजा।
- परीक्षा के बाद मोबाइल फोन कहां फेंका।
क्यों है यह मामला अहम?
उत्तराखंड में पिछले कुछ सालों से UKSSSC पेपर लीक और भर्ती घोटालों ने युवाओं के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खालिद और सबीहा जैसे आरोपितों की संलिप्तता ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
पेपर लीक से क्यों डगमगा रहा है युवाओं का भविष्य?
उत्तराखंड में UKSSSC पेपर लीक जैसे मामले अब आम होते जा रहे हैं। हर बार नए आरोपित पकड़े जाते हैं, पुलिस जांच होती है, लेकिन सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों बेरोजगार युवाओं को उठाना पड़ता है जो मेहनत से पढ़ाई कर परीक्षा देने आते हैं।
1. भरोसे पर चोट
हर पेपर लीक कांड से युवाओं का आयोग और सरकार पर भरोसा कमज़ोर होता है। कई अभ्यर्थी कहते हैं कि “मेहनत से पढ़ने का कोई फायदा नहीं, क्योंकि धांधली करने वाले पहले से पास हो जाते हैं।”
2. मानसिक और आर्थिक दबाव
बार-बार परीक्षा कैंसिल होने से युवा मानसिक तनाव में आ जाते हैं। कई उम्मीदवार सालों तक कोचिंग और तैयारी में पैसे खर्च करते हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया रुकने से उनकी उम्र और अवसर दोनों बर्बाद हो जाते हैं।
3. अपराध का जाल
इस तरह के नकल और पेपर लीक रैकेट सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं रहते। इनके तार अक्सर पॉलिटिकल और प्रशासनिक लॉबी तक जुड़े पाए जाते हैं। यही वजह है कि आरोपी लंबे समय तक बचते रहते हैं।
4. समाधान क्या है?
- डिजिटल सिक्योरिटी बढ़ाना: प्रश्न पत्रों की डिजिटली ट्रैकिंग और एन्क्रिप्टेड डिलीवरी।
- सख्त सजा: पेपर लीक में शामिल आरोपी और सहयोगियों को न्यूनतम 10 साल की सजा।
- पारदर्शी भर्ती प्रणाली: परीक्षा से लेकर रिजल्ट तक सभी प्रक्रिया पारदर्शी और ऑनलाइन हो।







