
मसूरी/देहरादून/ऋषिकेश: पहाड़ों की रानी मसूरी में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने के लिए विभिन्न विभागों ने संयुक्त मॉकड्रिल का आयोजन किया। इस दौरान भूस्खलन, सड़क जाम, वाहन खाई में गिरने और पर्यटकों के फंसने जैसे कई आपात हालातों का अभ्यास किया गया।
भूस्खलन और हादसे का सीन, टीमों ने संभाली कमान
मॉकड्रिल के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन की सूचना दी गई, जिससे मार्ग बाधित हो गया और कई पर्यटक फंस गए। साथ ही एक वाहन के खाई में गिरने की स्थिति बनाई गई।
सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया। तीन घायलों को सुरक्षित निकालकर प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल भेजा गया।
तालमेल और त्वरित कार्रवाई की जांच
अभ्यास के दौरान टीमों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का परीक्षण किया गया। सीओ जगदीश पंत ने बताया कि इस तरह के अभ्यास का उद्देश्य आपदा के समय जनहानि को कम करना और राहत कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना है।
देहरादून-ऋषिकेश में भी हुआ अभ्यास
देहरादून जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के निर्देश पर जिलेभर में व्यापक मॉकड्रिल की गई। इसमें 6.5 तीव्रता के भूकंप, ट्रांजिट कैंप में आग, बम की सूचना, गंगा में जलस्तर बढ़ने और भूस्खलन जैसी स्थितियों का अभ्यास किया गया।
ऋषिकेश में ट्रांजिट कैंप में बम की सूचना पर परिसर खाली कराया गया और सर्च ऑपरेशन चलाया गया। वहीं त्रिवेणी घाट क्षेत्र में बाढ़ की आशंका को देखते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभ्यास किया गया।
कर्णप्रयाग में भूकंप पर रेस्क्यू ड्रिल
कर्णप्रयाग में भूकंप की स्थिति का अभ्यास किया गया, जहां मकान और गोशाला के क्षतिग्रस्त होने का परिदृश्य बनाया गया। मलबे में दबे लोगों और पशुओं को निकालने के लिए एसडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने करीब 30 मिनट तक रेस्क्यू अभियान चलाया।
आपदा से निपटने की तैयारी का आकलन
अधिकारियों ने बताया कि यह पूरी मॉकड्रिल काल्पनिक थी, जिसका उद्देश्य आपदा से निपटने की तैयारियों को परखना और सिस्टम को और मजबूत बनाना है।







