
देहरादून: देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत वर्ष 2017 में देहरादून को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए चुना गया था।
कैग ने वर्ष 2018 से 2023 के बीच स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत किए गए कार्यों का ऑडिट किया, जिसमें कई वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2.93 करोड़ रुपये के कार्य बिना टेंडर के कराए गए, जबकि कुछ परियोजनाओं में अनुबंध समाप्त होने के बावजूद धनराशि की वसूली नहीं की गई।
19.06 करोड़ रुपये की राशि की नहीं हुई वसूली
कैग रिपोर्ट के अनुसार देहरादून स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने वर्ष 2019 में ब्रिज एंड रूफ कंपनी (इंडिया) लिमिटेड के साथ स्मार्ट रोड, सीवरेज और ड्रेनेज कार्यों के लिए समझौता किया था। इसके लिए कंपनी को 76.84 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
इन कार्यों को दिसंबर 2020 और जुलाई 2021 तक पूरा किया जाना था, लेकिन देरी और निर्माण कार्यों से आवागमन प्रभावित होने के कारण सितंबर 2022 में कंपनी के साथ किया गया समझौता समाप्त कर दिया गया।
उस समय तक कंपनी 57.78 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी थी, जबकि 19.06 करोड़ रुपये की शेष राशि वापस नहीं ली गई। कैग के अनुसार स्मार्ट सिटी कंपनी को यह धनराशि वापस वसूल करनी चाहिए थी।
देरी के बावजूद ठेकेदारों से नहीं लिया गया जुर्माना
कैग रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि परियोजनाओं में देरी होने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान होने के बावजूद इसका पालन नहीं किया गया।
परेड ग्राउंड के पुनर्निर्माण के लिए अक्टूबर 2019 में 18.92 करोड़ रुपये का अनुबंध किया गया था, जिसे अक्टूबर 2020 तक पूरा होना था। लेकिन फरवरी 2023 तक भी यह कार्य पूरा नहीं हुआ।
इसके बावजूद ठेकेदार से 1.41 करोड़ रुपये का अर्थदंड नहीं वसूला गया।
कई परियोजनाओं पर खर्च, लेकिन उपयोग नहीं
कैग के ऑडिट में कई ऐसी परियोजनाएं भी सामने आईं जिन पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन उनका उपयोग नहीं हो पाया।
कमांड एंड कंट्रोल सेंटर परियोजना के तहत 4.55 करोड़ रुपये की लागत से बायोमीट्रिक और सेंसर आधारित प्रणाली तैयार की गई, लेकिन फरवरी 2025 तक भी इसे लागू नहीं किया गया।
इसके अलावा स्मार्ट अपशिष्ट वाहन योजना के तहत 90 लाख रुपये खर्च कर खरीदे गए ई-रिक्शा दो साल तक संचालित नहीं हुए।
देहरादून में मौसम की जानकारी के लिए 2.06 करोड़ रुपये की लागत से लगाए गए पर्यावरण सेंसर और 3.24 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए मल्टी यूटिलिटी डक्ट का भी उपयोग नहीं हो पाया।
स्कूलों में लगे स्मार्ट उपकरण भी नहीं हुए इस्तेमाल
स्मार्ट सिटी योजना के तहत देहरादून के तीन सरकारी स्कूलों में 5.91 करोड़ रुपये की लागत से स्मार्ट उपकरण लगाए गए थे। इनमें प्रोजेक्टर, ई-कंटेंट, इंटरैक्टिव बोर्ड, कंप्यूटर लैब, सीसीटीवी और बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली शामिल थी।
लेकिन अत्यधिक बिजली बिल आने के कारण इन उपकरणों का उपयोग ही नहीं किया जा सका।
अन्य वित्तीय अनियमितताएं भी सामने आईं
कैग रिपोर्ट के अनुसार मॉडर्न दून लाइब्रेरी परियोजना में 24.70 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया।
स्मार्ट रोड परियोजना के तहत चकराता रोड के 1.9 किलोमीटर हिस्से में से 950 मीटर कार्य को तय प्रक्रिया से बाहर शामिल कर 19.47 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
इसके अलावा वर्ष 2017-18 से 2020-21 के बीच दो चालू खातों में राशि जमा रखने के कारण 6.2 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान भी हुआ।






