
देहरादून जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा योजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ गई है। निर्माण सामग्री का भुगतान 50 करोड़ रुपये से अधिक बकाया होने के कारण कई कार्य अधर में लटक गए हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार जुलाई माह के बाद से अब तक कोई नया बजट जारी नहीं हुआ है। ऐसे में निजी दुकानदारों ने भी निर्माण सामग्री उधार देने में हिचक दिखानी शुरू कर दी है। वित्तीय वर्ष 2024-25 समाप्ति के करीब है, लेकिन अब तक स्वीकृत योजनाओं का बड़ा हिस्सा अधूरा पड़ा है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले में कुल 8985 मनरेगा योजनाएं अनुमोदित की गई थीं। इनमें से अब तक केवल 1833 योजनाएं ही सौ प्रतिशत पूर्ण हो सकी हैं, जबकि 7152 योजनाएं अधूरी हैं। यानी दस माह में महज लगभग 22 प्रतिशत कार्य ही पूर्ण हो पाए हैं।
मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सीसी रोड, खड़ंजा, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी भवन, तालाब सौंदर्यकरण, चेकडैम, फार्म पाउंड और सिंचाई संरचनाएं जैसे पक्के निर्माण कार्य शामिल हैं। इन कार्यों में सीमेंट, बालू, बजरी और सरिया जैसी सामग्री की आवश्यकता होती है, जिसकी खरीद स्थानीय दुकानदारों से की जाती है।
प्रशासनिक स्थिति
विभागीय सूत्रों के अनुसार जुलाई माह में 12.37 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था, लेकिन इसके बाद कोई अतिरिक्त राशि प्राप्त नहीं हुई। परिणामस्वरूप निर्माण सामग्री की देनदारी 50 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई है।
दुकानदारों द्वारा भुगतान न मिलने की स्थिति में नई सामग्री देने से परहेज किया जा रहा है, जिससे निर्माणाधीन कार्यों की गति और धीमी हो गई है।
जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि निर्माण सामग्री की देनदारी बकाया है, लेकिन अधिकारियों की ओर से जल्द भुगतान जारी करने का भरोसा दिया गया है। उनके अनुसार, निर्माणाधीन योजनाओं का लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है और शेष कार्यों को वित्तीय वर्ष समाप्ति से पहले पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
विकासखंडवार अधूरी योजनाएं
डोईवाला – 443
रायपुर – 573
विकासनगर – 682
कालसी – 3114
सहसपुर – 477
चकराता – 1863
नई व्यवस्था और प्रस्ताव
मनरेगा को अब विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) के नाम से संबोधित किया जा रहा है। हालांकि नई कार्यप्रणाली की एसओपी अभी पूर्ण रूप से जारी नहीं हुई है। सॉफ्टवेयर रिव्यू की प्रक्रिया जारी है और फिलहाल नई योजनाओं के प्रस्ताव शामिल नहीं किए जा रहे हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीण क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि भुगतान में देरी से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कुछ दुकानदारों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि “लंबे समय से भुगतान न मिलने के कारण उधार में सामग्री देना मुश्किल हो गया है।”
आगे क्या होगा
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बजट जारी होने की उम्मीद है। यदि शीघ्र धनराशि प्राप्त होती है तो अधूरी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा। अन्यथा वित्तीय वर्ष के अंत तक लक्ष्य हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
यदि आपके क्षेत्र में कोई घटना, समस्या या जानकारी हो तो हमें ईमेल या फोटो/वीडियो भेजें —
📩 rishikeshnews.com@gmail.com





