
पौड़ी: जनपद पौड़ी में हर वर्ष जंगलों में लगने वाली आग से होने वाले नुकसान को रोकने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से वन विभाग ने इस बार एक नई पहल शुरू की है। वन विभाग पौड़ी की ओर से लीसा दोहन से रोजगार सृजन एवं वनाग्नि सुरक्षा जन-जागरूकता कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस पहल के माध्यम से ग्रामीणों, विशेषकर महिला समूहों और युवाओं को आजीविका से जोड़ने के साथ-साथ जंगलों को आग से बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
पौड़ी क्षेत्र में गर्मियों के दौरान वनाग्नि की घटनाएं हर वर्ष सामने आती हैं, जिससे वन संपदा और पर्यावरण को भारी नुकसान होता है। इसी को देखते हुए वन विभाग ने लीसा दोहन को संगठित और वैज्ञानिक ढंग से बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। कार्यक्रम के दौरान विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि लीसा दोहन केवल वन संपदा संरक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों के लिए स्वरोजगार का बड़ा अवसर भी है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों की आय में वृद्धि होगी।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि वनाग्नि की रोकथाम में जनसहभागिता बेहद जरूरी है और इस तरह के कार्यक्रम लोगों को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होने से पलायन पर भी प्रभावी रोक लगेगी।
गढ़वाल वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी महातिम यादव ने बताया कि वन विभाग द्वारा लीसा दोहन की प्रक्रिया को पूरी तरह वैज्ञानिक, संगठित और सुरक्षित पद्धति से संचालित किया जा रहा है। परंपरागत अवैज्ञानिक तरीकों के स्थान पर अब प्रशिक्षित श्रमिकों के माध्यम से तय मानकों के अनुसार पेड़ों को बिना नुकसान पहुंचाए लीसा निकाला जा रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस पहल से उन्हें रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। खासकर युवाओं और महिला समूहों के लिए यह योजना फायदेमंद साबित हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि इससे न केवल आय बढ़ेगी, बल्कि जंगलों की सुरक्षा को लेकर उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।
आंकड़े और तथ्य
वन विभाग के अनुसार, लीसा से प्राप्त राजस्व का एक बड़ा हिस्सा ग्राम पंचायतों को दिया जाता है, जिससे सड़क, पेयजल, सामुदायिक भवन, स्वच्छता और अन्य जनहित के विकास कार्यों को गति मिलती है। नियंत्रित लीसा दोहन से चीड़ के पेड़ों में मौजूद ज्वलनशील पदार्थों का दबाव कम होता है, जिससे गर्मियों के दौरान वनाग्नि की घटनाओं में कमी आने की संभावना रहती है।
आगे क्या होगा
वन विभाग की योजना है कि इस कार्यक्रम को अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जाए। इसके साथ ही लीसा दोहन, वनाग्नि रोकथाम और वन संरक्षण को लेकर निरंतर जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। नुक्कड़ नाटकों, लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों को जंगलों के महत्व और सामूहिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक किया जाएगा।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि प्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके लोकगीतों के माध्यम से वन संरक्षण और वनाग्नि सुरक्षा का संदेश प्रभावी ढंग से जनसमूह तक पहुंचा।
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