
देहरादून: उत्तराखंड में आगामी त्योहारी सीजन और चारधाम यात्रा को देखते हुए खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। विभाग का लक्ष्य है कि त्योहारों के दौरान आम लोगों को और चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को शुद्ध, सुरक्षित और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराया जा सके। इसी कड़ी में सैंपलिंग, छापेमारी और निरीक्षण की कार्रवाई तेज करने के निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग का मानना है कि समय रहते सख्ती बरतने से अनसेफ फूड के कारण बीमार पड़ने के मामलों में कमी लाई जा सकती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
हर साल त्योहारी सीजन में मिलावटखोरी के मामले सामने आते हैं, खासकर दूध और दूध से बने उत्पादों में, जिनकी मांग इस दौरान तेजी से बढ़ जाती है। इसके साथ ही चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रदेश में पहुंचते हैं, जिससे होटल, ढाबों और अस्थायी खाद्य प्रतिष्ठानों की संख्या बढ़ जाती है। इन्हीं कारणों से खाद्य संरक्षा विभाग की जिम्मेदारियां इस समय और बढ़ जाती हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि हाल ही में फूड सेफ्टी अधिकारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि सभी फूड वेंडर्स को यात्रियों को भोजन परोसने के सही मानकों की जानकारी दी जाएगी। लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन को दुकान में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा, ताकि यात्री सही और अधिकृत जगह पर ही भोजन कर सकें।
साथ ही सभी जिलों में निरीक्षण शुरू करने और मोबाइल टेस्टिंग वैन के जरिए लगातार सैंपलिंग करने के आदेश दिए गए हैं।
अपर आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन खाद्य दुकानों के पास लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नहीं है, उन्हें तत्काल बंद किया जाएगा। बंदी का नोटिस नजदीकी थाने में भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि यदि कोई प्रतिष्ठान बिना व्यवस्थाएं दुरुस्त किए दोबारा खुलता है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सके।
स्थानीय प्रतिक्रिया
व्यापारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियम सभी पर समान रूप से लागू किए जाएं, तो इससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा। कुछ खाद्य कारोबारियों ने यह भी कहा कि मिलावट करने वालों पर सख्ती जरूरी है, ताकि ईमानदारी से काम करने वालों की छवि खराब न हो।
आंकड़े और तथ्य
विभाग के अनुसार, हर साल त्योहारी और विवाह सीजन के दौरान दूध, मिठाइयों और खाद्य तेलों की खपत बढ़ जाती है। इसी कारण इस अवधि में सैंपलिंग और निरीक्षण की संख्या भी बढ़ाई जाती है। मोबाइल टेस्टिंग वैन और टीपीएम (टोटल पोलर कंपाउंड) मीटर के जरिए तेल की गुणवत्ता की जांच की जाती है।
आगे क्या होगा
खाद्य संरक्षा विभाग के उपायुक्त गणेश चंद्र कंडवाल ने बताया कि होली, नवरात्र और चारधाम यात्रा से पहले जिलों को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि सिर्फ त्योहारी सीजन ही नहीं, बल्कि वेडिंग सीजन के दौरान भी अन्य राज्यों से आने वाले दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच की जाएगी।
इसके अलावा, यूज्ड कुकिंग ऑयल को बार-बार इस्तेमाल करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अनसेफ तेल पाए जाने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान लागू होगा।
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