
देहरादून: देवभूमि रक्षा अभियान के संस्थापक स्वामी दर्शन भारती ने रविवार को प्रेसक्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में उर्मिला सनावर प्रकरण को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उर्मिला को उत्तराखंड लाने के बाद से उन्हें लगातार भला-बुरा कहा जा रहा है और यहां तक कि कालनेमि जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उर्मिला को सामने लाने से किसी को लाभ हो या न हो, इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
स्वामी दर्शन भारती ने बताया कि दिल्ली में हिंदू समाज के लिए काम करने वाले एक कलाकार के माध्यम से उन्हें उर्मिला सनावर के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद वे दिल्ली पहुंचे और उर्मिला को भरोसा दिलाकर देहरादून लेकर आए। उनका कहना है कि उर्मिला के सामने आने के बाद ही यह मामला सार्वजनिक हुआ और उसी के बाद जांच की दिशा बदली।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
स्वामी दर्शन भारती ने कहा कि उर्मिला को उत्तराखंड पुलिस पर भरोसा नहीं था और वह चाहती थीं कि उनके पास मौजूद डिवाइस पुलिस या एसआईटी को नहीं, बल्कि सीधे न्यायालय में जमा की जाए। उन्होंने दावा किया कि यदि उर्मिला ऑडियो को समाज के सामने न लातीं, तो आज सीबीआई जांच की संभावना भी नहीं बनती। उन्होंने कहा कि अब जब मामले की जांच सीबीआई कर रही है, तो कुछ लोग इससे बौखलाए हुए हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
प्रेसवार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्व जानबूझकर देवभूमि की सामाजिक आबोहवा को खराब करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि पर्वतीय जिलों में डेमोग्राफी में तेजी से बदलाव हो रहा है, जिस पर समाज को सचेत रहने की जरूरत है। देवभूमि को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
आगे क्या होगा
स्वामी दर्शन भारती ने कहा कि अंकिता हत्याकांड से जुड़े मामले में कुछ लोग उत्तराखंड के जेन-जी युवाओं को भड़का और बरगलाकर प्रदेश का माहौल बिगाड़ना चाहते हैं, लेकिन उनके मंसूबों को सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में वे भू-कानून के मुद्दे पर काम करेंगे और हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में सशक्त भू-कानून बनाने की पहल की जाएगी।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
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