
देहरादून: हरियावाला धौलास क्षेत्र में शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ा भूमि प्रकरण एक बार फिर चर्चा में है। ट्रस्ट द्वारा शैक्षणिक अकादमी के लिए खरीदी गई करीब 20 एकड़ भूमि पर निर्माण न हो पाने के बाद जमीन बेचने की अनुमति मांगी गई थी। मामले में उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार भूमि का लैंडयूज बदले बिना ही कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। फिलहाल प्रशासन इस पूरे प्रकरण की गहन जांच कर रहा है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
जानकारी के अनुसार शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट ने हरियावाला धौलास में शैक्षणिक अकादमी स्थापित करने के उद्देश्य से भूमि खरीदी थी। निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पाने पर ट्रस्ट ने जमीन बेचने की अनुमति के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया। अदालत की ओर से यह निर्देश दिए गए थे कि भूमि का लैंडयूज परिवर्तित नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
एसडीएस विनोद कुमार ने बताया कि मामले की जांच चल रही है और अब तक यह स्पष्ट हो चुका है कि जमीन का लैंडयूज बदला नहीं गया है। प्रशासन इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि संबंधित भूमि में केवल किसानों से खरीदी गई जमीन शामिल है या किसी अन्य प्रकार की भूमि भी इसमें सम्मिलित है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
हरियावाला की पूर्व प्रधान रजनी देवी ने इस मामले को कई बार जिला प्रशासन के समक्ष उठाया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में जमीन की बिक्री, बसावट और अवैध प्लाटिंग को लेकर स्थानीय लोग चिंतित हैं और वे लंबे समय से इस पर कार्रवाई की मांग कर रही हैं।
आंकड़े और तथ्य
प्रशासनिक जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इस 20 एकड़ भूमि में ग्राम समाज या वन विभाग की सरकारी भूमि तो शामिल नहीं की गई। साथ ही, सरकारी अभिलेखों में ट्रस्ट की ओर से एक व्यक्ति को पावर ऑफ अटॉर्नी दिए जाने और उसी के माध्यम से जमीन की बिक्री से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
आगे क्या होगा
प्रशासन के अनुसार जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। तब तक भूमि की खरीद-बिक्री और प्लाटिंग से जुड़े सभी बिंदुओं को रिकॉर्ड के आधार पर परखा जा रहा है।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
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