
देहरादून: उत्तराखंड में लंबे अंतराल के बाद होने जा रही जनगणना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य में जनगणना का पहला चरण मकानों की गणना से शुरू होगा, जिसके लिए वेब पोर्टल और मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च की जाएगी। इसके माध्यम से आम नागरिक खुद अपने मकानों की जानकारी दर्ज कर सकेंगे और इस राष्ट्रीय जिम्मेदारी में सक्रिय सहभागिता निभा पाएंगे। 2011 के बाद पहली बार होने जा रही जनगणना में इस बार डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का बड़े स्तर पर उपयोग किया जाएगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
देश में 2011 के बाद अब एक बार फिर जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। उत्तराखंड में इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए जनगणना निदेशालय लगातार तैयारियों में जुटा है। उत्तराखंड में जनगणना के नोडल अधिकारी और जनगणना सचिव दीपक कुमार ने बताया कि यह भारत सरकार का एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यापक कार्य है, जिसे समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाएगा।
जनगणना में बने सहयोगी, खुद दर्ज करें अपनी जानकारी
नोडल अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि उत्तराखंड में जनगणना को लेकर पिछले छह महीनों से तैयारियां चल रही हैं। अप्रैल से सितंबर के बीच किसी एक माह में मौसम और परिस्थितियों को देखते हुए मकानों की गणना कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस बार आईटी के उपयोग से आम लोगों के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा, जहां नागरिक अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। एप्लीकेशन में जानकारी भरने के बाद एक आईडी जनरेट होगी, जिसे बाद में जनगणना कर्मी सत्यापित करेंगे।
देश में पहली बार होगी पूरी तरह डिजिटल जनगणना
दीपक कुमार ने बताया कि देश में पहली बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जा रही है। इससे पहले 1872 से अब तक जनगणना मैन्युअल तरीके से होती रही है।
इस बार जब जनगणना कर्मी घर-घर जाएंगे, तो वे डिजिटल वेब एप्लीकेशन के माध्यम से डाटा एकत्र करेंगे, जिसे सीधे सेंट्रल सर्वर पर सुरक्षित रखा जाएगा। पहले चरण में मकानों की गणना और दूसरे चरण में लोगों की गणना की जाएगी।
अगले साल फरवरी में 20 दिन में होगी लोगों की गणना
नोडल अधिकारी ने बताया कि मकानों की गणना के बाद फरवरी 2027 में 20 दिनों के भीतर लोगों की गणना पूरी की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचना जारी हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि इस बड़े अभियान के लिए जनगणना निदेशालय को पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराया जाएगा और यह कार्य युद्धस्तर पर पूरा किया जाएगा।
दुर्गम पहाड़ों से मलिन बस्तियों तक पहुंचेगा जनगणना स्टाफ
दीपक कुमार ने स्पष्ट किया कि 2011 के बाद प्रदेश में कई नई बसावटें और भौगोलिक बदलाव हुए हैं, लेकिन इससे जनगणना प्रभावित नहीं होगी।
जहां भी मनुष्य मौजूद हैं, वहां तक जनगणना स्टाफ पहुंचेगा, चाहे वह हिमालय का दुर्गम गांव हो या मैदानी क्षेत्र की कोई नई मलिन बस्ती। मलिन बस्तियों की भी अलग-अलग श्रेणियों में गणना की जाएगी और किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा।
जनगणना में सहयोग की अपील
नोडल अधिकारी ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे राष्ट्र निर्माण से जुड़े इस महत्वपूर्ण कार्य में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही विकास योजनाएं, संसाधनों का आवंटन और भविष्य की नीतियां तय होती हैं।
सरकार द्वारा जनगणना शुरू होने से पहले वेब पोर्टल और एप्लीकेशन लॉन्च की जाएगी, ताकि लोग आसानी से अपनी जानकारी साझा कर सकें।
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