
हरिद्वार: हरिद्वार में आयोजित समाधि मंदिर स्थापना समारोह में लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से संत परंपरा, गुरु-शिष्य संबंध और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि संत परंपरा केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि समाज और सत्ता के संचालन की भी संवाहक रही है। अपने संबोधन में उन्होंने उत्तर प्रदेश के बीते हालात और वर्तमान परिदृश्य की तुलना करते हुए कहा कि दंगा, गुंडा और डंडा मुक्त उत्तर प्रदेश में अब सब चंगा है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
हरिद्वार में आयोजित यह कार्यक्रम ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी महाराज की स्मृति में समाधि मंदिर स्थापना से जुड़ा था। इस अवसर पर देश-भर से संत, महंत और श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान संत परंपरा, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना को लेकर वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले उत्तर प्रदेश में व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में न बेटियां सुरक्षित थीं और न ही व्यापारी। रामभक्तों पर गोलियां चलती थीं और उन्हें अपमानित किया जाता था, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदली हुई है। उन्होंने अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर को रामराज्य की परिकल्पना की पहली ठोस शुरुआत बताया।
संत परंपरा और भारत माता मंदिर का उल्लेख
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन की शुरुआत ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी महाराज के स्मरण से की। उन्होंने कहा कि करुणा, मैत्री और राष्ट्रभक्ति जिनके जीवन के मूल मूल्य थे, उन्होंने भारत माता मंदिर की स्थापना कर राष्ट्रीय एकता का सशक्त प्रतीक प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि 1982 में भारत माता मंदिर के लोकार्पण में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और तत्कालीन सर संघ चालक बालासाहेब देवरस की उपस्थिति राष्ट्र और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों का अद्भुत उदाहरण थी। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी महाराज ने किसी भी परिस्थिति में राष्ट्र के मूल्यों से समझौता नहीं किया।
आंकड़े और तथ्य
मुख्यमंत्री ने माघ मेले का उदाहरण देते हुए कहा कि जो मेला पहले केवल कल्पवासियों तक सीमित रहता था, वहां पौष पूर्णिमा से अब तक 21 करोड़ श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में स्नान कर चुके हैं। उन्होंने इसे प्रशासनिक व्यवस्था और जनविश्वास का परिणाम बताया।
विकास, ग्राम स्वराज और स्वरोजगार पर जोर
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में लूट आधारित तंत्र हावी था, जबकि आज किसान फिर से अन्नदाता बन गया है। उन्होंने कहा कि कामगार और कारिगर स्वरोजगार से जुड़ रहे हैं, जो ग्राम स्वरोजगार की अवधारणा को साकार करता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की प्राचीन शक्ति गांवों और स्वरोजगार पर आधारित थी, जिसे फिर से मजबूत किया जा रहा है।
उत्तराखंड और सीएम धामी को शुभकामनाएं
योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखंड को भारत की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बताते हुए कहा कि यह राज्य अब विकास और विरासत दोनों के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के निर्देशन में राज्य में संतुलित विकास हो रहा है। उन्होंने अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज, चारधाम और हरिद्वार को विकास और विरासत की साझा गाथा बताया।
मंच पर जयकारों का माहौल
कार्यक्रम का संचालन कर रहे महामंडलेश्वर डॉ. हरिचेतनानंद ने योगी आदित्यनाथ को संबोधन के लिए आमंत्रित करते हुए उन्हें “राष्ट्र का भविष्य” कहा। यह सुनते ही पांडाल में मौजूद संतों और श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के उद्घोष शुरू कर दिए। बाद में योगी आदित्यनाथ द्वारा “सियावर रामचंद्र की जय” के उद्घोष के साथ वातावरण शांत हुआ।
संबोधन के बाद कुछ समय के लिए असहज स्थिति तब बनी, जब संत और श्रद्धालु उठकर जाने लगे, जिसके बाद संचालन संभालते हुए अगले वक्ता का संबोधन प्रारंभ कराया गया।
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