
टिहरी गढ़वाल: टिहरी झील के आसपास रहने वाले प्रभावित और विस्थापित गांवों के जनप्रतिनिधि मंडल ने मंगलवार को पुनर्वास से जुड़े मुद्दे को लेकर कड़ा रुख अपनाया। प्रतिनिधिमंडल ने पुनर्वास निदेशक एवं जिलाधिकारी टिहरी को ज्ञापन सौंपते हुए पुनर्वास कार्य को टीएचडीसी से हटाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही पुनर्वास कार्य टीएचडीसी से नहीं हटाया गया, तो टिहरी डैम की झील के आसपास रहने वाले प्रभावित परिवार अपने बच्चों और पशुओं के साथ डीएम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठने को मजबूर होंगे। इस चेतावनी के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल देखी जा रही है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
टिहरी झील के निर्माण के बाद से आसपास के कई गांव प्रभावित और विस्थापित हुए हैं। इन गांवों के पुनर्वास की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पूर्व में पुनर्वास का कार्य सिंचाई विभाग के माध्यम से किया जाता रहा है। हाल के समय में पुनर्वास की जिम्मेदारी टीएचडीसी को दिए जाने के बाद से विस्थापित परिवारों में असंतोष बढ़ गया है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
ग्रामीणों द्वारा दिए गए ज्ञापन पर प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है कि मामले पर चर्चा की जाएगी। ज्ञापन लेने के बाद मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि डीएम और पुनर्वास निदेशक से इस विषय में बातचीत कर शासन को पत्र भेजा जाएगा, ताकि ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान निकाला जा सके। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय शासन स्तर पर होना बताया गया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
विस्थापित गांवों के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि जब मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, तब पुनर्वास कार्य को सिंचाई विभाग से हटाकर टीएचडीसी को सौंपना कई सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि मुख्य सचिव द्वारा 26 दिसंबर 2024 को जारी पत्र में पुनर्वास कार्य को पूर्व की भांति सिंचाई विभाग के पास ही रखने की बात कही गई थी, इसके बावजूद आदेश की अवहेलना की गई।
आंकड़े और तथ्य
ग्रामीणों के अनुसार, हनुमंत राव समिति की सिफारिशों, भारत सरकार की गाइडलाइन और पुनर्वास नीति में पुनर्वास का दायित्व राज्य सरकार का बताया गया है, जबकि टीएचडीसी को केवल फंड की व्यवस्था करनी है। विस्थापित परिवारों का कहना है कि टीएचडीसी एक निर्माण और लाभकारी संस्था है, जिसका पुनर्वास कार्य में प्रत्यक्ष संचालन उनके हित में नहीं है।
आगे क्या होगा
प्रशासन द्वारा शासन को पत्र भेजे जाने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रभावित और विस्थापित परिवारों ने डीएम कार्यालय के बाहर धरना देने की चेतावनी दोहराई है।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
यदि आपके क्षेत्र में कोई घटना, समस्या या जानकारी हो तो हमें ईमेल या फोटो/वीडियो भेजें —
📩 rishikeshnews.com@gmail.com




