
देहरादून: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के नए बजट ने उत्तराखंड की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। मनरेगा के स्थान पर लाए गए वीबी जीरामजी के लिए बजट में बड़ी धनराशि के प्रावधान को लेकर सत्तापक्ष इसे अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश करने में जुट गया है, जबकि विपक्ष इसे ग्रामीण रोजगार पर हमला बता रहा है। सत्ताधारी दल भाजपा के लिए यह बजट एक साथ तलवार और ढाल दोनों साबित हो सकता है, वहीं कांग्रेस इसे लेकर गांव-गांव आंदोलन की तैयारी में है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
मनरेगा को लेकर कांग्रेस प्रदेशभर में मोर्चा खोलने की तैयारी कर रही है। इसके जवाब में भाजपा ने बजट में वीबी जीरामजी के साथ मनरेगा के यथावत रखे गए कंपोनेंट को आधार बनाकर पलटवार की रणनीति बनाई है। पार्टी ने सांसदों, विधायकों, प्रदेश संगठन और आनुषंगिक संगठनों को बजट की प्रमुख बातों को जनता तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
भाजपा का कहना है कि यह बजट विकसित भारत के दीर्घकालिक एजेंडे को जमीन पर उतारने की दिशा में है। केंद्रीय बजट में भले ही तात्कालिक “गुलाबी घोषणाएं” न हों, लेकिन डबल इंजन सरकार का लक्ष्य विकसित और आत्मनिर्भर उत्तराखंड को मजबूती देना है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट ने कहा कि बजट में वीबी जीरामजी और मनरेगा के सामग्री कंपोनेंट की व्यवस्था को जनता के समक्ष विस्तार से रखा जाएगा और इसके लिए संगठनात्मक स्तर पर जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं।
आंकड़े और तथ्य
केंद्रीय बजट में उत्तराखंड के लिए रेल सुविधाओं के विस्तार हेतु 4700 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही शहरी निकायों और पंचायतों के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाई गई है। बजट में महिला सशक्तीकरण, युवाओं की शिक्षा, उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने वाले उपायों को भी शामिल किया गया है।
आगे क्या होगा
प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बजट एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने जा रहा है। कांग्रेस मनरेगा समाप्त करने के विरोध में प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ने की तैयारी में है, जबकि भाजपा बजट के प्रावधानों के जरिए ग्रामीण मतदाताओं तक अपना पक्ष पहुंचाने पर जोर दे रही है। आने वाले दिनों में यह बहस गांव-गांव और गली-मोहल्लों तक पहुंचने की संभावना है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बजट को लेकर शुरू हुई यह सियासी लड़ाई आने वाले महीनों में और तेज होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास को लेकर जनता की राय इस मुद्दे की दिशा तय करेगी।
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