
देहरादून: उत्तराखंड में एक गंभीर प्रशासनिक विवाद सामने आया है। केंद्र सरकार की एक वरिष्ठ ग्रुप ‘A’ राजपत्रित महिला अधिकारी ने देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल पर लगातार उत्पीड़न, वैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग और दुर्भावनापूर्ण मंशा के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा है। 31 जनवरी 2026 को की गई इस शिकायत में आरोप है कि जिला प्रशासन ने आपातकालीन शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए एक केंद्रीय स्वायत्त संस्था के वाहन को अवैध रूप से अधिग्रहित किया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
शिकायत के अनुसार, महिला अधिकारी वर्तमान में रक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था में कार्यरत हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा 31 जनवरी को जारी आदेश को उसी दिन अत्यधिक जल्दबाजी में लागू किया गया। अधिकारी ने सवाल उठाया है कि आखिर ऐसा कौन सा आपातकाल था, जिसके चलते एक वाहन के अधिग्रहण के लिए एडीएम, सीडीओ, आरटीओ, सहायक आरटीओ और पुलिस बल सहित पूरा जिला प्रशासनिक तंत्र तैनात किया गया।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
महिला अधिकारी के पत्र में कहा गया है कि जब अन्य विभागों के सरकारी या निजी वाहन उपलब्ध थे, तब विशेष रूप से एक केंद्रीय स्वायत्त संस्था के वाहन को निशाना बनाना चयनात्मक कार्रवाई और दुर्भावना को दर्शाता है।
फिलहाल इस पूरे मामले पर देहरादून जिला प्रशासन या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
प्रशासनिक हलकों में इस प्रकरण को केंद्र–राज्य संस्थागत संतुलन और सुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और संस्थागत मर्यादा बनी रहेगी।
आंकड़े और तथ्य
शिकायत पत्र में महिला अधिकारी ने जुलाई 2025 के पंचायत चुनावों का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि उन्हें 15 दिनों के भीतर दो बार चुनाव ड्यूटी पर लगाया गया, वह भी बिना प्रशिक्षण और नियमों के विपरीत।
उन्होंने यह भी कहा कि 2015 बैच की वरिष्ठ अधिकारी होने के बावजूद उन्हें 2017 बैच के एक कनिष्ठ अधिकारी के अधीन कार्य करने को बाध्य किया गया, जिसे उन्होंने मानसिक उत्पीड़न और अपमान बताया है।
आगे क्या होगा
महिला अधिकारी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि या तो जिलाधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए या फिर पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी पूछा है कि उनकी पूर्व शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला रक्षा मंत्रालय के समक्ष भी उठाया जा रहा है। राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए अधिकारी ने इसे कानून के शासन और संस्थागत मर्यादा से जुड़ा विषय बताया है।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
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