
पिथौरागढ़: उत्तराखंड में फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे सरकारी नौकरी पाने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। अब पिथौरागढ़ जिले से ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां बाहरी राज्यों का स्थायी निवासी बनकर डीएलएड डिप्लोमा हासिल किया गया और बाद में उत्तराखंड का स्थायी निवास प्रमाणपत्र लगाकर सहायक अध्यापक की नौकरी प्राप्त कर ली गई। प्राथमिक स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया में कई ऐसे अभ्यर्थी शामिल हैं जिनका मायका और ससुराल कुमाऊं मंडल में ही है। मामला उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग ने सत्यापन और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
जानकारी के मुताबिक, पिथौरागढ़ जिले के छह विकास खंडों में कुल 55 सहायक अध्यापक ऐसे पाए गए हैं, जिन्होंने डीएलएड की पढ़ाई उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों से की। इनमें से अधिकांश अभ्यर्थी मूल रूप से कुमाऊं मंडल के स्थायी निवासी बताए जा रहे हैं। बताया गया है कि डीएलएड डिग्री प्राप्त करने के लिए इन अभ्यर्थियों ने स्वयं को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों का स्थायी निवासी दर्शाया।
डिग्री हासिल करने के बाद इन लोगों ने सहायक अध्यापक पद के लिए आवेदन करते समय उत्तराखंड का स्थायी निवास प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया और नौकरी प्राप्त कर ली। इससे प्रदेश के प्रशिक्षित स्थानीय युवाओं के अधिकारों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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प्रशासनिक प्रतिक्रिया
पिथौरागढ़ के मुख्य शिक्षा अधिकारी तरुण कुमार पंत ने बताया कि सहायक अध्यापकों के स्थायी निवास प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है। इसके लिए विभागीय स्तर पर एक टीम का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि यह भी जांच की जा रही है कि संबंधित अभ्यर्थियों ने यूपी समेत अन्य राज्यों का स्थायी निवास प्रमाणपत्र किस आधार पर बनवाया। जांच रिपोर्ट आने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
पूर्व दर्जा राज्यमंत्री खजान गुड्डू ने कहा कि बाहरी राज्यों से गलत तरीके से डिग्री हासिल कर प्रदेश के प्रशिक्षित युवाओं के हक मारे जा रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदेश का युवा रोजगार के लिए भटक रहा है, ऐसे में सरकार को फर्जी तरीके से नौकरी पाने वालों की गंभीरता से जांच कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
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आंकड़े और तथ्य
शिक्षा विभाग की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गंगोलीहाट विकासखंड में 19, मुनस्यारी में 16 और धारचूला में 14 ऐसे सहायक अध्यापक तैनात हैं, जिन्होंने बाहरी राज्यों से डीएलएड डिप्लोमा हासिल किया। इनकी तैनाती जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में की गई है। कुल मिलाकर 55 सहायक अध्यापक इस पूरे मामले में जांच के दायरे में हैं।
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आगे क्या होगा
शिक्षा विभाग द्वारा गठित टीम सभी संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन करेगी। यदि जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाते हैं, तो नियमानुसार सेवा समाप्ति और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।
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