
ऋषिकेश: ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर काम कर रही रेल विकास निगम लिमिटेड ने पहाड़ों में रेल अवसंरचना को मल्टी-यूज़ बनाने की दिशा में बड़ा संकेत दिया है। परियोजना को समय पर पूरा करने के साथ ही गंगोत्री–यमुनोत्री के लिए प्रस्तावित रेल लाइन को गेम चेंजर बनाने की तैयारी है। योजना के तहत रेल लाइन के समानांतर बनाई जाने वाली सुरंगों का रोड सुरंगों के रूप में भी उपयोग किया जा सकेगा, ताकि यात्री वाहनों को तेज़, सुरक्षित और सुगम आवागमन मिल सके। इस संबंध में आरवीएनएल के नवनियुक्त सीएमडी सलीम अहमद की अध्यक्षता में करीब नौ घंटे चली मैराथन बैठक में अधिकारियों के साथ विस्तृत मंथन हुआ।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
आरवीएनएल के सीएमडी सोमवार सुबह ऋषिकेश स्थित मुख्यालय पहुंचे और ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। देवप्रयाग तक निरीक्षण का कार्यक्रम प्रस्तावित था। बैठक देर शाम तक चली, जिसमें वर्तमान परियोजना के साथ भविष्य की योजनाओं पर फोकस किया गया।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
सीएमडी ने स्पष्ट किया कि परियोजना को दिसंबर 2028 से पहले पूरा करना प्राथमिक लक्ष्य है। इसके लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय को अनिवार्य बताया गया।
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि रेल सुरंगों को इस तरह डिजाइन किया जाए, जिससे आवश्यकता पड़ने पर उनमें यात्री वाहन भी चल सकें। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में आवागमन के वैकल्पिक और सुरक्षित विकल्प विकसित होंगे।
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स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय स्तर पर इस प्रस्ताव को चारधाम यात्रा और मानसून के दौरान होने वाली सड़क बाधाओं के समाधान के रूप में देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि यदि सुरंगों का सड़क मार्ग के तौर पर भी उपयोग हुआ, तो आपात स्थितियों में बड़ी राहत मिलेगी।
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आंकड़े और तथ्य
ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल लाइन में तीन किलोमीटर से अधिक लंबी प्रत्येक सुरंग के साथ निकासी सुरंग बनाई जा रही है। इन निकासी सुरंगों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
परियोजना के लिए करीब 14 हजार पेड़ों का पातन हुआ है। इसके सापेक्ष दोगुने पौधों के रोपण हेतु वन विभाग को कैंपा मद में धनराशि दी जा चुकी है।
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आगे क्या होगा
गंगोत्री–यमुनोत्री में प्रस्तावित रेल संचालन डोईवाला स्टेशन से जोड़े जाने की योजना है। सुरंगों की चौड़ाई बढ़ाने, समय और लागत के आकलन पर आगे भी मंथन होगा। मानसून में सड़कें बंद होने की स्थिति में इन सुरंगों को वैकल्पिक मार्ग के तौर पर उपयोग में लाने का प्रस्ताव आगे बढ़ाया जाएगा।
बैठक में चारों पैकेज से जुड़े विदेशी विशेषज्ञों और निर्माण कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ पर्यावरण क्षतिपूर्ति, हरित विकास और व्यापक पौधारोपण पर भी चर्चा की गई।
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