
देहरादून: केंद्रीय बजट में खेती-किसानी को प्रोत्साहन मिलने से उत्तराखंड के किसानों को बड़ा संबल मिला है। पलायन, मौसम की मार और वन्यजीवों से फसल क्षति जैसी चुनौतियों से जूझ रहे राज्य के किसानों के लिए बजट में किए गए प्रावधान राहत देने वाले माने जा रहे हैं। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की ऋण सीमा तीन लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये किए जाने से राज्य के करीब नौ लाख किसानों को कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए वित्तीय मजबूती मिलेगी।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में देखें तो चालू वित्तीय वर्ष में 5,77,073 किसानों को 7,723 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया। इसमें ऊधम सिंह नगर के 1.47 लाख और हरिद्वार जिले के 1.18 लाख किसान शामिल हैं। बजट में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसान समय पर ऋण चुकाता है तो उसे ब्याज में चार प्रतिशत की छूट मिलेगी, जो पहले तीन प्रतिशत थी। इससे समय पर भुगतान को बढ़ावा मिलेगा और किसानों पर ब्याज का बोझ कम होगा।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
कृषि से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि केसीसी सीमा बढ़ने और ब्याज छूट से लघु एवं सीमांत किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे कृषि, पशुपालन और संबंधित गतिविधियों के लिए कार्यशील पूंजी की उपलब्धता बेहतर होगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
किसानों का कहना है कि ऋण सीमा बढ़ने से खेती के साथ-साथ बागवानी और पशुपालन में निवेश आसान होगा। कई किसानों ने इसे पलायन रोकने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है।
आंकड़े और तथ्य
बजट में पुराने और कम उपज वाले बागानों के पुनर्जीवन तथा पहाड़ों में अखरोट और खुमानी जैसे फलों के उत्पादन को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है। इससे औद्यानिकी से जुड़े किसानों को नई संभावनाएं मिलेंगी, उत्पादकता बढ़ेगी और आय में सुधार होगा।
इसके अलावा, चंदन की खेती को बढ़ावा देने की पहल से राज्य के किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है। जड़ी-बूटी शोध विकास संस्थान द्वारा चमोली, उत्तरकाशी और पौड़ी सहित कई जिलों में चंदन पौधारोपण कराया जा चुका है, जहां लगभग 15 वर्ष बाद उचित मूल्य मिलने की संभावना रहती है।
आगे क्या होगा
मत्स्य संपदा योजना के बजट में बढ़ोतरी से राज्य में नई मत्स्यपालन इकाइयों की स्थापना, जलाशयों और अमृत सरोवरों में मत्स्यपालन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही डेयरी और मुर्गीपालन के लिए एकीकृत मूल्य श्रृंखला तथा किसान उत्पादक संगठनों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
इसके अलावा, विषम भूगोल वाले उत्तराखंड में किसानों को बहुभाषीय एआई टूल भारत विस्तार के जरिए मौसम, कीट नियंत्रण और बाजार भाव की सटीक जानकारी मिलने की उम्मीद है, जिससे निर्णय लेना आसान होगा और योजनाओं से जुड़ाव बढ़ेगा।
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