
देहरादून में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर 8 फरवरी को प्रस्तावित महापंचायत की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस संबंध में विभिन्न सामाजिक संगठनों, जन सरोकारों से जुड़े समूहों, राज्य आंदोलनकारियों और राजनीतिक दलों की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में परेड ग्राउंड में होने वाली महापंचायत को सफल बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई। आयोजकों का कहना है कि इस महापंचायत का उद्देश्य अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को एकजुट स्वर में उठाना और जांच प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर स्पष्टता की मांग करना है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से बुलाई गई इस बैठक में 40 से अधिक संगठनों ने भागीदारी की। बैठक में विपक्षी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और जन आंदोलनों से जुड़े लोग मौजूद रहे। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पहले ही महापंचायत का समर्थन करते हुए अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग उठाई है।
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प्रशासनिक प्रतिक्रिया
सरकारी स्तर पर इस मुद्दे पर अभी तक कोई ताज़ा आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, आयोजकों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा सीबीआई जांच की संस्तुति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है, जिससे असमंजस बना हुआ है।
बैठक में क्या तय हुआ
बैठक में महापंचायत को व्यापक जनसमर्थन दिलाने के लिए अनुशासन और सुरक्षा समिति के गठन का निर्णय लिया गया। संगठनों ने यह आह्वान भी किया कि उत्तराखंड के प्रत्येक परिवार से कम से कम दो लोग महापंचायत में शामिल हों। सभी संगठनों ने एक स्वर में मांग की कि अंकिता मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में केंद्रीय एजेंसी सीबीआई से कराई जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।
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स्थानीय प्रतिक्रिया
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की सदस्य कमला पंत ने कहा कि सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति तो की है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह संस्तुति केंद्र सरकार को भेजी गई है या नहीं, और जांच का दायरा क्या होगा। वहीं, राज्य आंदोलनकारी मंच के जिला अध्यक्ष और प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लिखे गए पत्र से केवल औपचारिकता पूरी की गई प्रतीत होती है और इस संवेदनशील मामले को लेकर केंद्र सरकार की गंभीरता भी सवालों के घेरे में है।
आगे क्या होगा
आयोजकों के अनुसार आने वाले दिनों में महापंचायत की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा और जिलों में जनसंपर्क अभियान तेज किया जाएगा। 8 फरवरी को देहरादून के परेड ग्राउंड में प्रस्तावित महापंचायत के माध्यम से सरकार और जांच एजेंसियों पर निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई का दबाव बनाने की कोशिश की जाएगी।
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