
श्रीनगर (गढ़वाल): श्रीनगर में पर्यटकों और स्थानीय युवाओं के बीच हुई मारपीट की घटना में पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब इस प्रकरण ने राजनीतिक रूप ले लिया है। कानून व्यवस्था संभलने और स्थिति नियंत्रण में आने के बावजूद उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए कोतवाली में ज्ञापन सौंपा। इस कदम को कई लोग घटना के निस्तारण के बाद शुरू हुई राजनीतिक सक्रियता के रूप में देख रहे हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
घटना 29 जनवरी 2026 की है, जब श्रीनगर क्षेत्र में दिल्ली से आए कुछ पर्यटकों और स्थानीय युवाओं के बीच ओवरटेकिंग को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर पर्यटकों ने स्थानीय युवाओं के साथ मारपीट की। मामले के सामने आते ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दिल्ली के सात पर्यटकों को गिरफ्तार किया और दो वाहनों को सीज किया। पुलिस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में स्थिति सामान्य बताई गई।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
पुलिस का कहना है कि सूचना मिलते ही आवश्यक कदम उठाए गए और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तत्काल कार्रवाई की गई। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी हिरासत में हैं और आगे की वैधानिक प्रक्रिया जारी है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष के साथ भेदभाव नहीं किया गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का एक वर्ग मानता है कि पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर स्थिति को नियंत्रण में लिया। वहीं कुछ नागरिकों का कहना है कि घटना के बाद राजनीतिक दलों की सक्रियता से मामले को अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है।
आगे क्या होगा
इसी बीच यूकेडी ने कोतवाल के खिलाफ ज्ञापन सौंपते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए और माफी की मांग की। यूकेडी नेत्री सरस्वती देवी ने कहा कि पुलिस की कार्यशैली पर सार्वजनिक जवाबदेही जरूरी है। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच प्रक्रिया कानून के दायरे में आगे बढ़ाई जा रही है और किसी भी राजनीतिक दबाव में आकर कार्रवाई नहीं की जाएगी।






