
चौखुटिया: ‘नशा नहीं रोजगार दो’ आंदोलन की 42वीं वर्षगांठ के अवसर पर चौखुटिया विकासखंड के नव प्रभात पब्लिक स्कूल बसभीड़ा में बालप्रहरी और भारत ज्ञान विज्ञान समिति के संयुक्त तत्वावधान में बाल लेखन कार्यशाला का आयोजन किया गया। दो दिवसीय इस कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों में रचनात्मक सोच, लेखन क्षमता और सामाजिक चेतना को विकसित करना रहा। दूसरे दिन की शुरुआत ‘ज्ञान का दीया जलाने’ समूह गीत से हुई, जिसमें बच्चों ने सक्रिय सहभागिता दिखाई।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह कार्यशाला ‘नशा नहीं रोजगार दो’ आंदोलन की विचारधारा से प्रेरित रही, जो समाज में सकारात्मक सोच और स्वस्थ विकल्पों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। आयोजन में बच्चों को लेखन, कविता, नाटक और समूह गतिविधियों के माध्यम से अभिव्यक्ति का अवसर दिया गया। अध्यक्ष मंडल में दृष्टि किरौला, मनीष आर्या, मयंक भंडारी और लोकेश मेहरा शामिल रहे।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
कार्यशाला को लेकर विद्यालय प्रबंधन की ओर से सहयोगात्मक रुख देखने को मिला। विद्यालय के प्रबंधक ने बच्चों से पूरे मनोयोग से भाग लेने की अपील की, जबकि प्रधानाचार्य ने इस तरह की गतिविधियों को बाल विकास के लिए उपयोगी बताया। किसी प्रशासनिक अधिकारी की औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि इस तरह की कार्यशालाएं बच्चों के आत्मविश्वास और सोचने-समझने की क्षमता को बढ़ाती हैं। शिक्षकों ने भी माना कि लेखन और नाट्य गतिविधियों से बच्चे अपने आसपास के समाज को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।
आंकड़े और तथ्य
कार्यशाला के दौरान बच्चों ने निबंध लेखन की बारीकियां सीखीं। शिक्षिका दीपा तिवारी ने निबंध की संरचना, विषय चयन और प्रस्तुति पर विस्तार से जानकारी दी। बच्चों ने ‘लड़कियों की शिक्षा’, ‘गांव की महिलाओं की दिनचर्या’, ‘बच्चों में नशे की आदत’, ‘मेरा सपना’ जैसे विषयों पर निबंध लिखे।
इसके अलावा कविता लेखन, अंग्रेजी लेखन, खेल प्रतियोगिता, पहाड़ा और गिनती लेखन प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं, जिनमें चयनित बच्चों को बाल साहित्य उपहार स्वरूप दिया गया।
आगे क्या होगा
आयोजकों के अनुसार कार्यशाला के अंत में बच्चे अपनी-अपनी हस्तलिखित पुस्तकें तैयार करेंगे। इन पुस्तकों में गांव, जीवन की घटनाएं, यात्रा वर्णन और लोकगीत जैसे विषय शामिल होंगे। भविष्य में इस तरह की और कार्यशालाएं आयोजित करने की योजना है।







