
नैनीताल: उत्तराखंड में सहायक अध्यापक (प्राइमरी) भर्ती प्रक्रिया की काउंसलिंग में कम समय की सूचना और प्रशासनिक अव्यवस्था के चलते शामिल न हो पाए अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अवकाशकालीन न्यायाधीश सुभाष उपाध्याय की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि चयन का मुख्य आधार मेरिट होना चाहिए और काउंसलिंग से छूटे अभ्यर्थियों के लिए संबंधित जिलों में सीटें रिक्त रखी जाएं। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि प्रभावित अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा की जाए और अंतिम निर्णय तक उन सीटों को न भरा जाए।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
याचिकाओं में बताया गया कि 12 जनवरी को विभिन्न जिलों में काउंसलिंग एक ही दिन रख दी गई और इसकी सूचना महज 24 घंटे पहले दी गई। इतने कम समय में अभ्यर्थी अपने पसंदीदा जिलों तक नहीं पहुंच सके। स्थिति तब और जटिल हो गई जब काउंसलिंग करा रहे अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेज शाम चार बजे तक जमा रखे गए, जिससे दूसरे जिलों में जाने का विकल्प भी समाप्त हो गया।
आधिकारिक जानकारी
कोर्ट के समक्ष यह भी रखा गया कि भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं हुआ। नियमानुसार काउंसलिंग से पहले फाइनल मेरिट लिस्ट और पात्रता सूची सार्वजनिक की जानी चाहिए थी, लेकिन विभाग ने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय प्रारंभिक सूची के आधार पर सभी आवेदकों को बुला लिया गया, जिससे व्यापक अव्यवस्था फैली और अधिक अंक वाले कई अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए।
अभ्यर्थियों की दलील
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनसे कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों का चयन किया जा रहा है, जो मेरिट प्रणाली का सीधा उल्लंघन है। केवल समय की बाध्यता और सूचना के अभाव में किसी को उसके संवैधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन से पूरी प्रक्रिया पर जवाब तलब किया है।
कोर्ट का निर्देश
अदालत ने निर्देश दिया है कि जिन जिलों में याचिकाकर्ताओं ने मेरिट में होने के बावजूद काउंसलिंग में उपस्थित न हो पाने की विवशता जताई है, वहां उनके लिए सीटें आरक्षित रखी जाएं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मामले के पूर्ण निस्तारण तक उन सीटों को भरा न जाए।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार को कोर्ट के समक्ष निर्धारित समय में जवाब दाखिल करना होगा। तब तक चयन प्रक्रिया में संबंधित सीटों पर नियुक्ति नहीं की जाएगी। अंतिम निर्णय के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।







