
उत्तराखंड में भारी वर्षा और बर्फबारी के बाद मौसम साफ होने से लोगों को कुछ राहत मिली है। पहाड़ से लेकर मैदान तक धूप खिली, जिससे तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण हालात अब भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। कई गांवों का संपर्क कटा हुआ है और सड़क, बिजली, पानी व संचार सेवाएं प्रभावित हैं। देहरादून समेत आसपास के क्षेत्रों में रातभर हुई वर्षा के बाद बुधवार सुबह तेज धूप निकली, लेकिन शाम होते-होते सर्द हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी। यह स्थिति इसलिए अहम है क्योंकि पहाड़ों में जनजीवन के साथ-साथ आवागमन और आपात सेवाएं भी मौसम पर निर्भर हैं।
मामले की अहमियत
पर्वतीय जिलों में बर्फबारी का असर सीधे ग्रामीण संपर्क, आपूर्ति व्यवस्था और पर्यटन गतिविधियों पर पड़ता है। कई इलाकों में सड़कें बंद होने से आवश्यक सेवाएं प्रभावित हुई हैं, वहीं प्रशासन के लिए राहत और बहाली कार्य बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
पिछले वर्षों में भी भारी बर्फबारी के बाद कई बार गांवों का संपर्क कट चुका है। ऐसे हालात में बिजली, पानी और संचार सेवाओं को बहाल करने में समय लगता है, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
आधिकारिक जानकारी
रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ धाम में लगातार तीसरे दिन भारी बर्फबारी से पूरी केदारघाटी सफेद चादर में ढक गई है। शून्य से नीचे तापमान के बावजूद पुलिस और आईटीबीपी के जवान आवासीय भवनों, बैरकों और संपर्क मार्गों से बर्फ हटाने में जुटे रहे। जवानों ने घंटों मेहनत कर आवासीय काटेज को सुरक्षित रखा, ताकि आपात सेवाएं बाधित न हों।
ऊखीमठ-चोपता-मंडल मोटर मार्ग को बर्फ हटाकर यातायात के लिए सुचारु कर दिया गया है। चिरबटिया और घिमतोली क्षेत्रों में भी मार्ग बहाल किए गए हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि मौसम साफ होने से राहत जरूर मिली है, लेकिन बर्फ से ढके गांवों में रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना अब भी मुश्किल बना हुआ है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि मार्ग पूरी तरह खुलते ही स्थिति सामान्य होगी।
विशेषज्ञ की राय
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बर्फबारी के बाद साफ मौसम अस्थायी राहत देता है, लेकिन तापमान में तेजी से उतार-चढ़ाव से हिमस्खलन और पाले का खतरा बना रहता है। ऐसे में सतर्कता जरूरी है।
आंकड़े और तथ्य
- प्रदेशभर में डेढ़ सौ से अधिक गांव बर्फ से ढके हुए हैं।
- चमोली जिले के 77 से अधिक गांव प्रभावित बताए गए हैं।
- बदरीनाथ, नीति और चोपता हाईवे फिलहाल बंद हैं।
- ज्योतिर्मठ-औली मोटर मार्ग को यातायात के लिए खोल दिया गया है।
आगे क्या होगा
मौसम विभाग के अनुसार, आज प्रदेशभर में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में कहीं-कहीं घने कोहरे को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। आगामी शनिवार से एक बार फिर मौसम बदल सकता है। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की वर्षा और बर्फबारी की संभावना जताई गई है।
पांच जिलों में हिमस्खलन की चेतावनी
रक्षा भू-सूचना अनुसंधान संस्थान की ओर से उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में गुरुवार शाम पांच बजे तक हिमस्खलन की चेतावनी जारी की गई है। इसमें उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले शामिल हैं। शासन ने संबंधित जिलों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं।
ऊंची चोटियों पर भारी हिमपात
बदरीनाथ, औली, हेमकुंड साहिब और नीति घाटी समेत ऊंची चोटियों पर भारी हिमपात हुआ है। निचले इलाकों जैसे ज्योतिर्मठ, गोपेश्वर, चमोली और नंदप्रयाग में वर्षा दर्ज की गई। औली-ज्योतिर्मठ सड़क पर फंसे पर्यटकों और वाहनों को जेसीबी की मदद से मार्ग खोलकर सुरक्षित निकाला गया।
मसूरी में मौसम का दूसरा हिमपात
मसूरी और आसपास के क्षेत्रों धनोल्टी, बुरांशखंडा, सुरकंडा, नागटिब्बा और काणाताल में पांच दिनों के भीतर मौसम का दूसरा हिमपात हुआ है। हिमपात के बाद बारिश से अधिकांश बर्फ पिघल गई, लेकिन ठंड में इजाफा दर्ज किया गया। बर्फबारी देखने के लिए धनोल्टी और बुरांशखंडा में पर्यटक भी पहुंचे।







