
देहरादून: उत्तराखंड में जन्म से ट्रांसजेंडर और ट्रांसजेंडर पहचान के साथ रह रहे बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने पहल तेज कर दी है। इस क्रम में मंगलवार को उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की बैठक आयोजित हुई, जिसमें संबंधित विभागों के अधिकारियों ने ट्रांसजेंडर बच्चों के संरक्षण, समावेशन और समग्र विकास से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। बैठक में यह तथ्य सामने आया कि समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजना का अब तक एक भी ट्रांसजेंडर बच्चे ने लाभ नहीं उठाया है, जो नीतियों के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
ट्रांसजेंडर बच्चों को पहचान, दस्तावेजीकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पारिवारिक अस्वीकार्यता, सामाजिक भेदभाव और संस्थागत बाधाएं इनके विकास में बड़ी रुकावट बनी हुई हैं। ऐसे में आयोग स्तर पर यह बैठक राज्य में एक समन्वित रणनीति तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आधिकारिक जानकारी
बैठक में आयोग की अध्यक्ष गीता खन्ना ने कहा कि ट्रांसजेंडर बच्चे जन्म से ही मानसिक दबाव और सामाजिक तंज का सामना करते हैं। उनके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, सुरक्षित वातावरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है।
समाज कल्याण विभाग ने बताया कि प्रदेश में अनुमानित करीब 1000 ट्रांसजेंडर हैं, लेकिन बीते छह वर्षों में केवल 76 का ही प्रमाणन हो पाया है। पहचान उजागर करने में झिझक और जागरूकता की कमी इसकी बड़ी वजह है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ट्रांसजेंडर समाज के प्रतिनिधियों ओशीन और अदिति ने बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य और पारिवारिक समावेशन आज भी सबसे बड़ी चुनौती है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में कानून लागू होने के बावजूद कई शिक्षण संस्थानों में आईडी कार्ड और नामांकन प्रक्रियाओं में ट्रांसजेंडर विकल्प उपलब्ध नहीं है, जिससे उन्हें पुरुष या महिला श्रेणी में ही नामांकन के लिए मजबूर होना पड़ता है।
विशेषज्ञ की राय
चिकित्सकों ने बताया कि एम्स ऋषिकेश में ट्रांसजेंडर बच्चों और उनके अभिभावकों की काउंसलिंग के साथ हार्मोन थेरेपी और सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। संस्थान में पृथक ट्रांसजेंडर क्लीनिक स्थापित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों ने सुप्रीम कोर्ट के नालसा बनाम भारत संघ फैसले और ट्रांसजेंडर पर्सन्स (Protection of Rights) एक्ट, 2019 का हवाला देते हुए जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
आंकड़े / तथ्य
प्रदेश में अनुमानित ट्रांसजेंडर: करीब 1000
प्रमाणित ट्रांसजेंडर: 76
यू-डाईस पोर्टल में नामांकित ट्रांसजेंडर बच्चे: केवल 3
9वीं–10वीं के लिए छात्रवृत्ति: 13,500 रुपये प्रतिवर्ष
छात्रवृत्ति लाभार्थी: शून्य
आगे क्या होगा
आयोग ने महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के साथ समन्वय कर ट्रांसजेंडर बच्चों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने को लेकर उच्च स्तरीय बैठक बुलाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य में ट्रांसजेंडर बच्चों के लिए सुरक्षित आवास और परामर्श सुविधाएं विकसित करने पर भी काम शुरू होगा।





