
हल्द्वानी: हल्द्वानी के आशारोड़ी रेंज अंतर्गत कड़वापानी बीट क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण रोकने गई महिला बीट अधिकारी के साथ अभद्रता का मामला सामने आया है। आरोप है कि आश्रम की ओर से दीवार निर्माण रोकने पर बीट अधिकारी की स्कूटी की चाबी छीन ली गई और उन्हें धमकाया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने हस्तक्षेप कर माफी मंगवाकर मामला शांत कराया, हालांकि निर्माण कार्य पर फिलहाल रोक नहीं लग सकी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राज्य सरकार की ओर से वन भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में सख्ती के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को विरोध और दबाव का सामना करना पड़ रहा है। आशारोड़ी रेंज का यह मामला इसी क्रम में सामने आया है।
बीट अधिकारी की रिपोर्ट में क्या कहा गया
बीट अधिकारी रेनू जोशी ने वन क्षेत्राधिकारी आशारोड़ी रेंज को दी रिपोर्ट में बताया कि वन भूमि से सटे हरिओम आश्रम की ओर से दीवार का निर्माण किया जा रहा था। बीट मैप में उस स्थान पर मुनारा (बाउंड्री पिलर) नहीं पाया गया। इस पर आश्रम संचालक को निर्माण रोकने के निर्देश दिए गए, लेकिन आरोप है कि उन्होंने न केवल निर्देश मानने से इनकार किया बल्कि अभद्रता भी की।
संयुक्त सर्वे के बावजूद नहीं रुका अतिक्रमण
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 में राजस्व और वन विभाग ने संयुक्त सर्वे कर उक्त भूमि को वन एवं झाड़ी क्षेत्र के रूप में दर्ज किया था। इसके बावजूद वन भूमि को सुरक्षित रखने के ठोस प्रयास नहीं किए गए। बीट अधिकारी का आरोप है कि जब भी उन्होंने अतिक्रमण रोकने का प्रयास किया, आश्रम संचालक की ओर से उन्हें नौकरी से हटवाने तक की धमकी दी गई।
घटना के दिन क्या हुआ
मंगलवार को बीट अधिकारी रेनू जोशी जब एक बार फिर निर्माण रोकने पहुंचीं, तो आरोप है कि आश्रम से जुड़े एक युवक ने पहले उनका मोबाइल छीनने का प्रयास किया और बाद में उनकी स्कूटी की चाबी निकाल ली। बीट अधिकारी ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस के सख्त रुख के बाद युवक ने माफी मांगी, हालांकि चाबी वापस नहीं की गई। बाद में आश्रम की ओर से ही डुप्लीकेट चाबी बनवाई गई।
गोवंश से जुड़ा गंभीर आरोप
बीट अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में हरिओम आश्रम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आश्रम में निराश्रित गोवंश की देखभाल का दावा किया जाता है, लेकिन वन क्षेत्र में घायल, बीमार और मृत गोवंश पाए गए हैं। तस्वीरों और वीडियो के माध्यम से वन क्षेत्र में मृत गोवंश की स्थिति सामने रखी गई है। आरोप है कि मृत गोवंश को खाने के लिए आवारा कुत्ते वन क्षेत्र में पहुंच रहे हैं, जिससे वन्यजीवों पर भी खतरा बढ़ रहा है।
आधिकारिक जानकारी
आशारोड़ी रेंज के वन क्षेत्राधिकारी प्रभाष वेदवाल ने बताया कि वर्ष 2020 के संयुक्त सर्वे के बाद स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है। इस कारण दोबारा सर्वे कराने के लिए लिखा गया है। यदि सर्वे में अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही वन क्षेत्र में मृत गोवंश पाए जाने के मामलों में भी आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
आगे क्या होगा
प्रशासन की ओर से दोबारा सर्वे और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस घटना के बाद वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों की सुरक्षा और अतिक्रमण मामलों में सख्त कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।







