
पिथौरागढ़: सीमांत जिला पिथौरागढ़ में पिछले दिनों हुई भारी बर्फबारी के बाद उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हो गया है। धारचूला से आदि कैलाश को जाने वाली सड़क पर ढाई फुट से अधिक बर्फ जमने के कारण चीन सीमा से लगे अंतिम गांव कुटी से आगे आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। हालिया बर्फबारी से माइग्रेशन वाले गांव बर्फ से लकदक हैं, वहीं कई क्षेत्रों में यातायात और दैनिक गतिविधियां ठप हो गई हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
शीतकाल में हर वर्ष अधिक बर्फबारी के कारण व्यास और दारमा घाटी के ऊंचाई वाले गांवों का संपर्क सीमित हो जाता है। हालांकि हाल के वर्षों में सड़क निर्माण के बाद सर्दियों में भी कुछ हद तक आवाजाही संभव हो पाई है, लेकिन भारी बर्फबारी होते ही मार्ग बंद हो जाते हैं।
व्यास घाटी में बर्फबारी की स्थिति
व्यास घाटी के बूंदी, गर्त्यांग, गुंजी, नपलच्यू, रांगकांग, नाबी और कुटी गांवों में बर्फबारी दर्ज की गई है। सबसे अधिक बर्फ कुटी गांव में जमी है, जो समुद्र तल से 12,303 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। ग्राम प्रधान नगेंद्र सिंह कुटियाल ने बताया कि गांव में लगभग डेढ़ फुट बर्फ जमा है, जबकि कुटी से आदि कैलाश जाने वाली सड़क पर दो फुट से अधिक बर्फ होने के कारण न वाहन और न ही पैदल आवाजाही संभव है।
दारमा घाटी में भी बिगड़े हालात
धारचूला की दारमा घाटी के दांतू, दुग्तू सहित अन्य गांवों में भी लगातार बर्फबारी हो रही है। ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान माइनस में चला गया है, जिससे ग्रामीणों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पंचाचूली शिखर के दर्शन कर लौटे पर्यटक
होम स्टे संचालक संजय जंग और गुड्डू जंग ने बताया कि मंगलवार को हुई बर्फबारी के बावजूद सड़क खुली रहने से दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश सहित पिथौरागढ़ और रुद्रपुर से लगभग 40 से अधिक पर्यटक पंचाचूली शिखर के दर्शन कर लौटे। पर्यटकों ने बर्फबारी के बीच दारमा घाटी की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की।
सड़क बनने से बदली स्थिति
कुछ वर्ष पहले तक दारमा और व्यास घाटियां सड़क से नहीं जुड़ी थीं, जिसके कारण अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक ग्रामीण अपने पशुओं के साथ निचली घाटियों की ओर चले जाते थे। सड़क बनने के बाद अब शीतकाल में भी आवाजाही संभव हो रही है। कई ग्रामीणों ने होम स्टे शुरू किए हैं, जिससे सर्दियों में भी पर्यटक पहुंचने लगे हैं। हालांकि अत्यधिक बर्फबारी के दौरान नालों पर अस्थायी ग्लेशियर बनने से मार्ग पूरी तरह बंद हो जाते हैं।
होम स्टे संचालकों को उम्मीद
होम स्टे संचालकों का कहना है कि सड़क खुली रहने से शीतकालीन पर्यटन की संभावनाएं बढ़ी हैं। भविष्य में इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। हालांकि माइनस तापमान और कठिन मौसम में यात्रियों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण बना रहता है।
विद्यालयों में अवकाश
मुनस्यारी क्षेत्र में मंगलवार देर शाम फिर बर्फबारी होने से मार्ग बंद हो गए हैं और कई स्थानों पर वाहन फंसे हुए हैं। मौसम विभाग द्वारा हाई अलर्ट जारी किए जाने के बाद जिलाधिकारी ने बुधवार को कक्षा 12 तक सभी विद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया है। जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी का सिलसिला जारी है।
आगे क्या होगा
प्रशासन के अनुसार मौसम पर लगातार नजर रखी जा रही है। बर्फ हटने के बाद ही मार्ग खोलने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। लोगों से अपील की गई है कि अनावश्यक यात्रा से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।







