
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल, श्रीनगर में लंबे समय से संविदा पर कार्यरत फार्मासिस्टों की नई याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब इसी मामले में पहले ही आदेश जारी हो चुके हैं और सरकार को निर्णय लेने के लिए तय समय-सीमा अभी समाप्त नहीं हुई है, तब समान मांगों के साथ दोबारा याचिका दायर करना न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। यह फैसला संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और चल रही भर्ती प्रक्रिया—दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यह मामला उन फार्मासिस्टों से जुड़ा है जो पिछले करीब 14 वर्षों से श्रीनगर स्थित बेस अस्पताल में संविदा आधार पर सेवाएं दे रहे हैं। याचियों ने पहले भी अदालत का रुख किया था और नियमितीकरण के साथ-साथ नई भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग उठाई थी। इस विषय पर पहले दिए गए न्यायालयी निर्देशों के बाद सरकार को निर्णय के लिए समय दिया गया था, जिसे अभी पूरा नहीं किया गया है।
आधिकारिक जानकारी
सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक महरा की अवकाशकालीन एकलपीठ के समक्ष हुई। अदालत को बताया गया कि इससे पहले 19 अक्टूबर 2024 को जारी विज्ञप्ति के माध्यम से 73 फार्मासिस्ट पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इस पर दायर याचिका में हाईकोर्ट ने 12 दिसंबर 2025 को आदेश देते हुए सरकार को छह महीने के भीतर नियमितीकरण पर विचार हेतु समिति गठित करने के निर्देश दिए थे। साथ ही, यह भी कहा गया था कि अंतिम निर्णय तक याचियों की सेवा में कोई व्यवधान नहीं डाला जाएगा।
सरकार की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि याचियों के प्रत्यावेदन अभी विचाराधीन हैं और कोर्ट द्वारा दी गई छह महीने की अवधि अभी समाप्त नहीं हुई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से सेवाएं देने के बावजूद नियमितीकरण को लेकर लगातार अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं, कुछ कर्मचारियों ने यह भी बताया कि अदालत के पहले आदेश के बाद सरकार से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद अभी बाकी है।
आंकड़े / तथ्य
भर्ती प्रक्रिया के तहत 73 पदों पर चयन किया जाना है।
इस प्रक्रिया में सफल अभ्यर्थियों का परिणाम 17 जनवरी 2026 को घोषित किया जा चुका है।
नियमों के अनुसार, 4 दिसंबर 2018 तक 10 वर्षों की निरंतर सेवा पूरी करने वाले संविदा कर्मचारी नियमितीकरण के पात्र माने जाएंगे।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट के अनुसार, चूंकि पूर्व आदेश में तय समय-सीमा अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए सरकार द्वारा गठित समिति के निर्णय का इंतजार किया जाएगा। विभागीय स्तर पर याचियों के दावों की समीक्षा जारी रहेगी और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।







