
नैनीताल: नैनीताल हाईकोर्ट ने उधम सिंह नगर जिले के आईटीआई थाना क्षेत्र में दर्ज एक गंभीर आपराधिक मामले में याचिकाकर्ताओं को बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है। उत्तराखंड हाईकोर्ट की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि यह राहत जांच में पूर्ण सहयोग की शर्त पर दी गई है। अदालत ने मामले की प्रकृति और दोनों पक्षों के तर्कों को देखते हुए शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया है और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मामला उधम सिंह नगर जिले के आईटीआई थाना क्षेत्र का है, जहां 11 जनवरी 2026 को विकास यादव समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई थीं। आरोपियों ने इन आरोपों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक की मांग की थी।
आधिकारिक जानकारी
सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ में हुई। प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 (दुष्कर्म), धारा 74 (लज्जा भंग) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/4 के तहत आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने प्रारंभिक स्तर पर यह माना कि मामले में दोनों पक्षों के तर्कों की विस्तृत जांच आवश्यक है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कानूनी जानकारों का कहना है कि अदालत का यह आदेश यह संकेत देता है कि गंभीर आरोपों वाले मामलों में भी प्रक्रियात्मक संतुलन और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए। स्थानीय स्तर पर लोग अगली सुनवाई पर अदालत के रुख को लेकर नजर बनाए हुए हैं।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने दलील दी कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। उनके अनुसार, वास्तविक घटना में शिकायतकर्ता पक्ष ने ही याचिकाकर्ताओं के साथ मारपीट की थी। अपनी गलती छिपाने और दबाव बनाने के उद्देश्य से दुर्भावनापूर्ण तरीके से यह एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसका कोई ठोस कानूनी या तथ्यात्मक आधार नहीं है।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता को नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अंतरिम आदेश के तहत याचिकाकर्ताओं को जांच के दौरान गिरफ्तार न करने के निर्देश दिए गए हैं, बशर्ते वे जांच में पूरा सहयोग करें। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद निर्धारित की गई है। तब तक अंतरिम राहत प्रभावी रहेगी।





