
देहरादून: उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में हुई भारी बर्फबारी के बाद राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने शनिवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से प्रदेश में वर्षा, बर्फबारी और कोहरे के कारण उत्पन्न हालात की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को 24×7 अलर्ट मोड में रहते हुए जन सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर बहाल करने के निर्देश दिए। राज्य में फिलहाल 66 सड़कें बर्फबारी के कारण बंद बताई जा रही हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
प्रदेश में जनवरी माह के अंतिम सप्ताह में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से व्यापक बर्फबारी और वर्षा दर्ज की गई है। इससे पर्वतीय जिलों में सड़क संपर्क, बिजली और पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर वाहनों और लोगों के फंसे होने की सूचनाएं भी सामने आई हैं।
आधिकारिक जानकारी
सचिव आपदा प्रबंधन ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और नियमित रूप से अपडेट ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जन सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी व्यवस्थाएं शीघ्र सुचारू की जाएं। समीक्षा बैठक में बंद मार्गों, बिजली व पेयजल आपूर्ति, तथा फंसे लोगों से जुड़े मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सड़कों की स्थिति
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार 24 जनवरी की शाम तक प्रदेश में कुल 66 सड़कें बाधित रहीं। इनमें 6 नेशनल हाईवे, 6 स्टेट हाईवे, 3 मुख्य जिला मार्ग, 1 अन्य जिला मार्ग, 24 लोक निर्माण विभाग की सड़कें और 26 ग्रामीण सड़कें शामिल हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि बर्फबारी से जहां ठंड बढ़ गई है, वहीं सड़क बंद होने से रोजमर्रा की आवाजाही में दिक्कतें आ रही हैं। लोगों ने प्रशासन से जल्द मार्ग खोलने और आवश्यक सेवाएं बहाल करने की मांग की है।
हिमस्खलन की चेतावनी
रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान DGRE चंडीगढ़ द्वारा 24 जनवरी 2026 सायं 5 बजे से 25 जनवरी 2026 सायं 5 बजे तक हिमस्खलन की चेतावनी जारी की गई है। बुलेटिन के अनुसार उत्तरकाशी जिले में 2800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खतरा स्तर-2 (येलो), चमोली में 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खतरा स्तर-3 (ऑरेंज) जबकि रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में 2800 मीटर से अधिक ऊंचाई पर खतरा स्तर-2 दर्शाया गया है।
आगे क्या होगा
जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही पर नियंत्रण रखा जाए, राहत एवं बचाव संसाधनों को तैयार अवस्था में रखा जाए और बिजली व पेयजल आपूर्ति बहाली को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश हैं।






