
रामनगर। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से सटे तराई पश्चिमी वन प्रभाग के फाटो इको-टूरिज्म सफारी जोन में वन्यजीव पर्यटन नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो का संज्ञान लेते हुए तराई पश्चिमी के डीएफओ प्रकाश आर्य ने दो जिप्सियों, उनके चालकों और उनमें बैठे नेचर गाइड्स को अनिश्चितकाल के लिए सफारी जोन में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
वन्यजीव पर्यटन में तय मानकों का उद्देश्य जानवरों की सुरक्षा के साथ-साथ पर्यटकों की जान-माल की हिफाजत करना है। फाटो इको-टूरिज्म जोन संवेदनशील क्षेत्र है, जहां गति सीमा और दूरी से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन अनिवार्य है।
घटना का विवरण
डीएफओ के अनुसार 13 जनवरी 2026 को सुबह की पाली के दौरान फाटो इको-टूरिज्म सफारी जोन में नेचर गाइड आशीष दफोटी, राज कराकोटी तथा जिप्सी चालक अमजद और शमशाद (कलुआ) द्वारा नियमों के विपरीत सफारी कराई गई। वायरल वीडियो में स्पष्ट दिखा कि टाइगर की मौजूदगी की सूचना मिलते ही जिप्सियों को निर्धारित गति से कहीं अधिक तेज चलाया गया और वाहन को बाघ के बेहद नजदीक ले जाया गया।
खतरे और संभावित जोखिम
डीएफओ ने बताया कि ऐसी लापरवाही वन्यजीवों के लिए खतरा पैदा करती है और मानव–वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ाती है। तेज रफ्तार और अनुशासनहीनता से बाघ के आक्रामक होने की संभावना रहती है, जिससे किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। इस कृत्य से संबंधित चालकों और गाइड्स ने अपनी ही नहीं, पर्यटकों की जान भी जोखिम में डाली।
वन विभाग की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित जिप्सी चालकों और नेचर गाइड्स को अग्रिम आदेशों तक फाटो इको-टूरिज्म सफारी जोन में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया गया है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों के उल्लंघन पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों और नियमित पर्यटकों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई जरूरी है, ताकि सफारी के दौरान अनुशासन बना रहे और वन्यजीवों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
आगे क्या होगा
वन विभाग ने संकेत दिए हैं कि सफारी संचालन पर निगरानी और कड़ी की जाएगी। नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए गाइड्स और चालकों की नियमित ब्रीफिंग तथा औचक जांच की जाएगी।






