
ऋषिकेश: ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना को बड़ी प्रशासनिक गति मिली है। परियोजना के शेष पांच रेलवे स्टेशनों के वित्तीय टेंडर खुलने के साथ ही सभी 13 स्टेशनों से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया पूरी हो गई है। इनमें परियोजना का सबसे बड़ा स्टेशन कर्णप्रयाग भी शामिल है, जिसे टर्मिनस के रूप में विकसित किया जाएगा और यहां 26 रेल लाइनें बिछाई जाएंगी। संबंधित कंपनियों को निर्माण कार्य शुरू करने के लिए तीन माह का समय दिया गया है। परियोजना का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक काम पूरा करना है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह रेल लाइन गढ़वाल क्षेत्र की कनेक्टिविटी, आपदा-प्रबंधन और पर्यटन को मजबूती देती है। परियोजना में कुल 13 स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिनमें से कुछ पर संचालन शुरू हो चुका है और कुछ पर निर्माण प्रगति पर है।
पैकेज-वार स्थिति
पैकेज दो के अंतर्गत देवप्रयाग, जनासू, मलेथा और श्रीनगर (चौरास) स्टेशनों के वित्तीय टेंडर खुल चुके हैं; इनके तकनीकी टेंडर पहले ही स्वीकृत हो चुके थे। पैकेज चार में केवल कर्णप्रयाग स्टेशन शामिल है, जो इस परियोजना का सबसे बड़ा स्टेशन होगा और टर्मिनस के रूप में विकसित किया जाएगा। पैकेज तीन के धारी देवी, तिलनी, घोलतीर और गौचर स्टेशनों के लिए दोनों टेंडर पहले ही खुल चुके हैं और निर्माण सामग्री की आपूर्ति शुरू हो गई है।
कर्णप्रयाग टर्मिनस की विशेषताएं
कर्णप्रयाग स्टेशन को टर्मिनस के रूप में तैयार किया जाएगा। यहां 26 रेल लाइनें प्रस्तावित हैं, जिससे भविष्य में संचालन क्षमता और विस्तार दोनों को बल मिलेगा। स्टेशन के तकनीकी टेंडर नवंबर में और अब वित्तीय टेंडर भी स्वीकृत हो चुके हैं।
निर्माण और संचालन की मौजूदा स्थिति
परियोजना में बीरभद्र और योगनगरी ऋषिकेश स्टेशनों पर ट्रेन संचालन हो रहा है। शिवपुरी और ब्यासी स्टेशनों पर निर्माण कार्य जारी है। पैकेज दो और चार के स्टेशनों का निर्माण कार्य तीन माह के भीतर शुरू किए जाने की तैयारी है।
आंकड़े और तथ्य
परियोजना की कुल लागत 16,216 करोड़ रुपये है। कुल लंबाई 126 किलोमीटर है, जिसमें 17 सुरंगें शामिल हैं और 105 किलोमीटर लाइन सुरंगों से होकर गुजरेगी। सबसे लंबी सुरंग 14.08 किलोमीटर (देवप्रयाग–जनासू) और सबसे छोटी 200 मीटर (सेवई–कर्णप्रयाग) है। 11 सुरंगों की लंबाई छह किलोमीटर से अधिक है। प्रस्तावित 13 स्टेशनों में बीरभद्र, योगनगरी ऋषिकेश, शिवपुरी, ब्यासी, देवप्रयाग, जनासू, मलेथा, श्रीनगर (चौरास), धारी देवी, रुद्रप्रयाग (सुमेरपुर), घोलतीर, गौचर और कर्णप्रयाग (सेवई) शामिल हैं।
आधिकारिक जानकारी
परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसी रेल विकास निगम लिमिटेड के अनुसार सभी स्टेशनों की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उप महाप्रबंधक (सिविल) ओपी मालगुड़ी ने बताया कि कंपनियों को कार्य प्रारंभ करने के लिए निर्धारित समय दिया गया है और दिसंबर 2028 तक परियोजना पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि परियोजना पूरी होने से क्षेत्र की कनेक्टिविटी, रोजगार और पर्यटन को नई गति मिलेगी। आपदा के समय वैकल्पिक आवागमन के रूप में भी यह रेल लाइन महत्वपूर्ण साबित होगी।
आगे क्या होगा
निर्धारित समयसीमा में पैकेज दो और चार के स्टेशनों पर निर्माण शुरू होगा। इसके साथ ही चल रहे कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी, ताकि दिसंबर 2028 के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।




