
ऋषिकेश: तीर्थनगरी ऋषिकेश में मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। गुरुवार को त्रिवेणी घाट पर एक दिव्यांग बालक लावारिस हालत में रोता मिला। बालक की उम्र करीब छह–सात साल बताई जा रही है। वह न तो चल पाने की स्थिति में था और न ही कुछ स्पष्ट बोल पा रहा था। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज में दो युवक बच्चे को घाट तक लाते हुए दिखाई दिए हैं, जिनकी पहचान की जा रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
घटना के समय त्रिवेणी घाट में शिव मूर्ति के पीछे बालक अकेला बैठा रो रहा था। शुरुआत में वहां मौजूद लोगों ने समझा कि बच्चे के स्वजन आसपास ही होंगे। काफी देर तक कोई नहीं आया तो भीड़ जमा हो गई और पुलिस को सूचना दी गई। बालक अपनी स्थिति या स्वजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं दे पाया।
पुलिस की कार्रवाई
सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आसपास बालक के स्वजनों की तलाश की, लेकिन कोई पता नहीं चल सका। इसके बाद पुलिस ने बालक को अपने संरक्षण में लिया। त्रिवेणी घाट पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच में दो युवक बच्चे को घाट तक लाते हुए नजर आए। एक युवक के हाथ में हेलमेट भी दिखाई दिया। पुलिस उनकी पहचान और तलाश में जुटी है।
आधिकारिक जानकारी
ऋषिकेश कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक कैलाश चंद भट्ट ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर युवकों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। घटना की सूचना बाल कल्याण समिति को दे दी गई है। समिति के सदस्य अनिल बिष्ट और अरविंद नेगी ने कोतवाली पहुंचकर मामले की जानकारी ली।
बच्चे की देखभाल और आगे की प्रक्रिया
पुलिस के अनुसार बालक को आवश्यक देखभाल और सुरक्षा के लिए देहरादून स्थित शिशु निकेतन भेजा जाएगा। बाल कल्याण समिति के दिशा-निर्देशों के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, ताकि बच्चे की सुरक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित हो सके।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
तीर्थनगरी में इससे पहले भी नवजात या भ्रूण को लावारिस छोड़ने के मामले सामने आ चुके हैं। कुछ माह पहले आईडीपीएल क्षेत्र में झाड़ियों में नवजात मिलने की घटना हुई थी। हालांकि, उन मामलों में भी जिम्मेदार लोगों का पता नहीं चल पाया। ताजा घटना ने एक बार फिर समाज और प्रशासन के सामने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
आगे क्या होगा
पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्ध युवकों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। बाल कल्याण समिति की निगरानी में बच्चे के संरक्षण और पुनर्वास से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।




