
देहरादून: श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के खिलाफ प्रदेशभर के निजी कॉलेज संचालकों ने आंदोलन का एलान किया है। संचालकों का आरोप है कि विश्वविद्यालय संबद्धता शुल्क के नाम पर मनमानी कर रहा है, जिसके कारण कई संस्थानों की संबद्धता अटकी हुई है। इससे न केवल कॉलेजों का शैक्षणिक कामकाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि छात्रों को छात्रवृत्ति जैसी सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है। मामले को लेकर गुरुवार को देहरादून के भानियावाला क्षेत्र में निजी कॉलेज संचालकों की अहम बैठक हुई।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
प्रदेश में निजी कॉलेज उच्च शिक्षा का एक बड़ा हिस्सा संभालते हैं। इनके माध्यम से हजारों छात्रों को स्नातक और परास्नातक स्तर की शिक्षा मिलती है। ऐसे में संबद्धता से जुड़े विवाद का सीधा असर शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य पर पड़ता है।
बैठक में क्या बोले संचालक
भानियावाला स्थित एक होटल में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय पिछले कई सत्रों से संस्थानों से अनावश्यक संबद्धता शुल्क की मांग कर रहा है। इसके साथ ही वर्षों से संबद्धता और विस्तारण प्रमाणपत्र जारी नहीं किए जा रहे, जिससे कॉलेजों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
छात्रवृत्ति और नैक प्रक्रिया पर असर
निजी कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुनील अग्रवाल ने कहा कि संबद्धता विस्तारण प्रमाणपत्र जारी न होने के कारण छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पा रही है। साथ ही कॉलेज नैक जैसी महत्वपूर्ण गुणवत्ता मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए आवेदन तक नहीं कर पा रहे हैं।
यूजीसी नियमों के पालन का मुद्दा
बैठक में यूजीसी के नियमों के अनुसार वर्ष में दो बार प्रवेश की व्यवस्था लागू न किए जाने पर भी नाराजगी जताई गई। संचालकों का कहना है कि इससे छात्रों के अवसर सीमित हो रहे हैं और निजी कॉलेजों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कमजोर हो रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
निजी कॉलेज संचालकों का कहना है कि एक समय सरकार निजी संस्थानों को बढ़ावा देना चाहती थी, लेकिन अब निजी विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ने के बाद शासन और विश्वविद्यालय का रवैया निजी कॉलेजों के प्रति असहयोगपूर्ण हो गया है।
आगे क्या होगा
संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन को तेज करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर उच्च न्यायालय की शरण लेंगे। बैठक में देहरादून, हरिद्वार, रुड़की और गढ़वाल क्षेत्र के कुल 42 निजी कॉलेजों के संचालक मौजूद रहे।







