
देहरादून: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने उत्तराखंड में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान को गति देने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। उन्होंने राज्य सरकार पर मनरेगा का नाम बदलने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कम करने और योजना को कमजोर करने के आरोप लगाए। गोदियाल ने कहा कि भाजपा सरकार के बदलावों के बाद मनरेगा रोजगार की गारंटी से हटकर सीमित दिनों की योजना बनकर रह गई है, जिससे ग्रामीणों को नुकसान हो रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का बड़ा आधार रही है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र और राज्य स्तर पर किए गए बदलावों से योजना की मूल भावना प्रभावित हुई है और इसका सीधा असर गांवों में रोजगार पर पड़ा है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने राज्यव्यापी अभियान शुरू किया है।
समिति का गठन और जिम्मेदारियां
गणेश गोदियाल ने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ समिति के संयोजक के रूप में विधायक विक्रम सिंह नेगी को नामित किया है। समिति में विधायक मनोज तिवारी, वीरेंद्र जाति, आदेश चौहान और डीडी कुनियाल को सदस्य बनाया गया है। समिति का दायित्व होगा कि वह अपने-अपने जिलों में पंचायत स्तर पर चौपालों का आयोजन कर मनरेगा में किए गए बदलावों की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाए और उन्हें जागरूक करे।
कांग्रेस के आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यूपीए सरकार द्वारा शुरू की गई मनरेगा योजना रोजगार की गारंटी देती थी, लेकिन वर्तमान में यह 60 दिन रोजगार तक सीमित होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी, जबकि अब इसे राज्यों पर डालने की मंशा योजना को धीरे-धीरे समाप्त करने की है। गोदियाल ने कहा कि इससे राज्य सरकारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा और ग्रामीण रोजगार प्रभावित होगा।
पंचायतों की भूमिका पर सवाल
गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पंचायतों को गांवों के विकास में निर्णायक भूमिका दी थी, लेकिन अब निर्णय दिल्ली से थोपे जा रहे हैं कि कहां सड़क बनेगी और कहां तालाब। इन प्रतिबंधों को लेकर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी पत्र को चौपालों में पढ़कर ग्रामीणों को वितरित किया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कांग्रेस के अनुसार, बुधवार को प्रतापनगर विधानसभा क्षेत्र में विधायक विक्रम सिंह नेगी ने टिहरी जिले के 20 गांवों में चौपालों का आयोजन किया। इस दौरान चार गांवों के प्रधानों ने अभियान से प्रभावित होकर भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा की।
आगे क्या होगा
प्रत्येक ब्लॉक और पंचायत में आयोजित चौपालों की रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी के माध्यम से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मनरेगा संग्राम कंट्रोल रूम को भेजी जाएगी। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि समिति के संयोजक और सदस्य गांव-गांव जाकर अभियान को मजबूती देंगे।






