
ऋषिकेश: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज़ादी के बाद जवाहर लाल नेहरू के शासनकाल में जब नीतियां पाश्चात्य विचारों से प्रभावित होकर बनाई जा रही थीं, तब गीता प्रेस ने ‘कल्याण’ पत्रिका के माध्यम से हिंदू धर्म, दर्शन, आचार-विचार और कला-संस्कृति को समाज के सामने मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि कल्याण पत्रिका के शताब्दी वर्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक नीतियों में बदलाव का काम तेज़ी से आगे बढ़ा है, जिसका प्रभाव देश के धार्मिक-सांस्कृतिक परिदृश्य में स्पष्ट दिख रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित ‘कल्याण’ पत्रिका भारतीय समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना के प्रसार का एक सशक्त माध्यम रही है। आज़ादी के बाद के शुरुआती दशकों में जब नीति-निर्माण में पश्चिमी प्रभाव की चर्चा होती रही, उसी दौर में इस पत्रिका ने सनातन मूल्यों और परंपराओं को निरंतर प्रस्तुत किया। शताब्दी वर्ष के अवसर पर यह विमर्श एक बार फिर केंद्र में आया है।
आधिकारिक जानकारी
बुधवार को पौड़ी जिले के स्वर्गाश्रम स्थित गीता भवन में गीता प्रेस की ‘कल्याण’ पत्रिका के सौ वर्ष पूरे होने पर शताब्दी अंक का विमोचन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित संत, धर्माचार्य और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
अमित शाह का वक्तव्य
अमित शाह ने कहा कि आज़ादी के बाद रक्षा, विदेश, व्यापार और शिक्षा नीतियां पश्चिमी विचारों से प्रभावित होकर बन रही थीं, लेकिन उस समय भी ‘कल्याण’ पत्रिका ने सनातन धर्म के आदर्शों को समाज के सामने रखा। उन्होंने कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि साढ़े पांच सौ साल बाद रामलला को अपमानजनक स्थिति से बाहर निकालकर भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ है। केदारनाथ का पुनरुद्धार किया गया है और अब बदरीनाथ सहित 35 धामों के नवीनीकरण की योजना पर कार्य चल रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का कहना है कि ‘कल्याण’ पत्रिका ने पीढ़ियों तक भारतीय संस्कृति और मूल्यों को जोड़ने का काम किया है। उनका मानना है कि शताब्दी वर्ष पर इस तरह का विमोचन और विचार-विमर्श समाज में सांस्कृतिक चेतना को और मजबूत करेगा।
आंकड़े / तथ्य
‘कल्याण’ पत्रिका ने सौ वर्षों की यात्रा में लाखों पाठकों तक पहुंच बनाते हुए सनातन धर्म, दर्शन और संस्कृति से जुड़े विषयों को निरंतर प्रकाशित किया है। शताब्दी अंक को इसी विरासत का प्रतीक माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
शताब्दी वर्ष के दौरान गीता प्रेस और उससे जुड़े संगठनों द्वारा देशभर में विभिन्न सांस्कृतिक और वैचारिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के माध्यम से सनातन मूल्यों और सामाजिक सरोकारों पर संवाद को आगे बढ़ाया जाएगा।







