
देहरादून: आपदा में क्षतिग्रस्त पांवटा साहिब राजमार्ग के नंदा की चौकी पुल की मरम्मत का रास्ता अभी भी साफ नहीं हो पाया है। पहले बजट और औपचारिकताओं के कारण टेंडर की तिथि बढ़ानी पड़ी, और अब टेंडर खुले तो तीन में से दो कंपनियों को तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित कर दिया गया। एकमात्र पात्र बोली बचने पर नियमों के तहत प्रक्रिया निरस्त करनी पड़ी है। नतीजतन, पुल की मरम्मत चार माह बाद भी शुरू नहीं हो सकी, जबकि यातायात अब भी अस्थायी व्यवस्था के सहारे चल रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
15 सितंबर की मध्यरात्रि हुई अतिवृष्टि में टौंस नदी पर बने नंदा की चौकी पुल का एक हिस्सा ढह गया था, जिससे पांवटा साहिब राजमार्ग पर आवागमन ठप हो गया। कुछ दिनों बाद नदी के एक भाग पर ह्यूम पाइप डालकर अस्थायी पुलिया बनाई गई। फिलहाल इसी वैकल्पिक व्यवस्था से वाहनों का संचालन किया जा रहा है, जो दीर्घकालिक समाधान नहीं है।
आधिकारिक जानकारी
लोक निर्माण विभाग (प्रांतीय खंड) के अधिकारियों के अनुसार टेंडर में कुल तीन ठेकेदार/फर्मों ने भाग लिया था। तकनीकी जांच में दो प्रतिभागी अयोग्य पाए गए। एकल निविदा रह जाने के कारण प्रक्रिया को नियमों के अनुसार निरस्त करना पड़ा। अब मंगलवार को दोबारा टेंडर खोले जाएंगे, ताकि तकनीकी रूप से योग्य प्रतिभागियों का चयन कर वित्तीय निविदा की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।
टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण
पुल का यह हिस्सा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधीन आता है। अधीक्षण अभियंता ओपी सिंह के अनुसार पहले चरण में एनएचएआई से बजट संबंधी औपचारिकताएं पूरी न हो पाने के कारण टेंडर तिथि आगे बढ़ानी पड़ी। बाद में, क्षेत्र में राजमार्ग चौड़ीकरण और ग्रीन फील्ड परियोजनाओं के चलते प्राधिकरण ने क्षतिग्रस्त हिस्से के निर्माण में असमर्थता जताई और कार्य लोनिवि को सौंपने की सहमति दी। धनराशि उपलब्ध कराने की बात कही गई, लेकिन इसी बीच तकनीकी अयोग्यता के चलते टेंडर निरस्त हो गया।
डिजाइन में सुधार और निर्माण की योजना
लोनिवि ने क्षतिग्रस्त एबटमेंट वाल के नए सिरे से निर्माण के लिए करीब 16 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की है। वर्ष 1992 में बने पुल की कमियों को इस डीपीआर में दुरुस्त किया गया है। परीक्षण में सामने आया कि पुराने निर्माण में किनारे की एबटमेंट वाल ओपन फाउंडेशन पर थी, जबकि बीच के पिलर वेल फाउंडेशन पर बने थे। तेज बहाव में बीच के पिलर सुरक्षित रहे, लेकिन किनारे की वाल क्षतिग्रस्त हो गई। नए डिजाइन में ओपन फाउंडेशन की जगह वेल फाउंडेशन का प्रावधान किया गया है, जिसकी गहराई 20 मीटर से अधिक होगी। सुरक्षा के अतिरिक्त प्रावधान भी जोड़े गए हैं।
वेल और ओपन फाउंडेशन का फर्क
वेल फाउंडेशन गहरी नींव की तकनीक है, जिसमें बड़े बेलनाकार ढांचे को जमीन में गहराई तक उतारा जाता है, जो नदियों और जलमग्न क्षेत्रों में पुलों के लिए अधिक सुरक्षित मानी जाती है। इसके विपरीत ओपन फाउंडेशन उथली नींव होती है, जो ठोस और शुष्क जमीन के लिए उपयुक्त रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार नदी क्षेत्र में पुलों के लिए वेल फाउंडेशन ही ज्यादा टिकाऊ विकल्प है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि अस्थायी पुलिया पर यातायात जोखिम भरा है, खासकर भारी वाहनों और बारिश के समय। वे मांग कर रहे हैं कि टेंडर प्रक्रिया को जल्द पूरा कर स्थायी मरम्मत शुरू की जाए, ताकि राजमार्ग पर सामान्य आवागमन बहाल हो सके।
आगे क्या होगा
लोनिवि अधिकारियों के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही काम शुरू कर दो से तीन माह में पुल को यातायात के लिए खोलने का लक्ष्य है। मंगलवार को दोबारा टेंडर खुलने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी कि मरम्मत कार्य कब धरातल पर उतरता है।




