
देहरादून: दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें सीनियर छात्रों पर जूनियर छात्र से मारपीट करने के साथ-साथ उसके साथी छात्र को धमकाकर उसी से अपने दोस्त की पिटाई करवाने के आरोप लगे हैं। एंटी रैगिंग कमेटी की जांच में यह तथ्य सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया। दबाव में आकर मारपीट करने वाले छात्र को भी रैगिंग का पीड़ित मानते हुए उसकी शिकायत दर्ज की गई है। यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि इससे मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान में छात्रों की सुरक्षा और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग रोकने के लिए सख्त नियम लागू हैं, इसके बावजूद समय-समय पर ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। दून मेडिकल कॉलेज में इससे पहले भी वर्ष 2023 में रैगिंग के दो मामले सामने आए थे, जिनमें दोषी छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई थी। ताजा घटना ने एक बार फिर रैगिंग की समस्या को उजागर किया है।
आधिकारिक जानकारी
कॉलेज प्रशासन के अनुसार, एंटी रैगिंग कमेटी ने पूरे मामले की जांच करते हुए संबंधित छात्रों के बयान दर्ज किए हैं। इसके साथ ही वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखा गया है। प्रशासन का कहना है कि वर्ष 2016 में स्थापित दून मेडिकल कॉलेज के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी रैगिंग की घटना है और इसी अनुरूप कार्रवाई की गई है।
जांच में क्या सामने आया
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि सीनियर छात्रों ने न केवल एक जूनियर छात्र के साथ मारपीट की, बल्कि उसके मित्र को धमकाकर उसी से अपने साथी की पिटाई भी करवाई। दबाव में आकर मारपीट करने वाले छात्र को भी पीड़ित मानते हुए उसकी शिकायत दर्ज की गई है, ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो सके।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कॉलेज परिसर में छात्रों का कहना है कि इस घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया है। कई छात्रों ने मांग की है कि रैगिंग के खिलाफ और सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में किसी छात्र को इस तरह की प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।
आंकड़े / तथ्य
वर्ष 2023 में रैगिंग के मामलों में दोषी छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित किया गया था और एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। ताजा घटनाक्रम के बाद प्रशासन ने रैगिंग के खिलाफ सख्ती और निगरानी बढ़ाने के संकेत दिए हैं।
आगे क्या होगा
कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच के आधार पर दोषी पाए जाने वाले छात्रों के खिलाफ नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, रैगिंग रोकने के लिए जागरूकता अभियान और निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा।






