
साहिया: जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में शादियों के दौरान बढ़ती फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के उद्देश्य से ग्रामीण बैठकों में महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले गहनों की संख्या सीमित करने का फैसला चर्चा में है। प्रस्ताव के अनुसार, शादियों में महिलाओं को केवल तीन गहने पहनने की अनुमति दी जा रही है। हालांकि, इस निर्णय पर अब महिलाओं की आपत्तियां सामने आने लगी हैं। उनका कहना है कि यह पाबंदी महिलाओं पर असमानता थोपती है, जबकि पुरुषों की फिजूलखर्ची—विशेषकर महंगी शराब—पर कोई रोक नहीं लगाई जा रही। इसी कारण यह मुद्दा सामाजिक बहस का रूप ले चुका है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
जौनसार बावर क्षेत्र में शादियों से जुड़ी परंपराएं समय के साथ बदलती रही हैं। पहले यहां मंगलसूत्र पहनने की परंपरा नहीं थी और पारंपरिक गहनों में तुंगल, नाक की फूली, बुलाक, उतरेई, कट्टी तथा चांदी के सूच और कच का प्रचलन रहा है। हाल के वर्षों में शादियों में बढ़ते खर्च को लेकर पंचायतों और ग्रामीण समाज में चिंता बढ़ी, जिसके बाद गहनों की संख्या सीमित करने जैसे प्रस्ताव सामने आए।
निर्णय और उसके पीछे की मंशा
ग्रामीण बैठकों में यह तर्क दिया गया कि शादियों में दिखावे और आर्थिक बोझ को कम करने के लिए महिलाओं के गहनों की संख्या सीमित की जाए। प्रस्ताव के तहत केवल तीन गहनों—मंगलसूत्र, नाक की फूली और कान के झुमके या तुंगल—की अनुमति दी जा रही है। समर्थकों का कहना है कि इससे समाज में अनावश्यक खर्च कम होगा और आर्थिक संतुलन बनेगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि यदि फिजूलखर्ची रोकना उद्देश्य है, तो पाबंदी सभी खर्चों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। महिलाओं ने सवाल उठाया कि गहनों पर रोक तो लगाई जा रही है, लेकिन शादियों में शराब, बीयर और अन्य महंगे आयोजनों पर कोई नियंत्रण क्यों नहीं है।
वार्ड निरीक्षण के दौरान एक महिला ने विधायक के समक्ष यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि गहने महिलाओं की जमापूंजी और घर की संपत्ति हैं, जिन्हें निशाना बनाना न्यायसंगत नहीं है।
जनप्रतिनिधियों की राय
विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने इस विषय पर कहा कि सामाजिक निर्णय पंचायतों और समाज को आपसी सहमति से लेने चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायतों द्वारा लिए गए सामाजिक फैसलों में राजनीतिक हस्तक्षेप उचित नहीं है।
महिलाओं की आवाज
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य अतरों देवी का कहना है कि जौनसार बावर क्षेत्र की हर खत और गांव में शादियों के दौरान फिजूलखर्च कम होना चाहिए, लेकिन इसके लिए गहनों को ही निशाना बनाना सही नहीं है।
वहीं, पूर्व ग्राम प्रधान अनीता तोमर ने कहा कि महिलाओं के गहने मुसीबत के समय काम आने वाली जमापूंजी हैं। यदि सच में फिजूलखर्ची रोकनी है, तो शादी में शराब, बीयर, फल-फ्रूट और ड्राईफ्रूट जैसे खर्चों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
आगे क्या होगा
जौनसार बावर में यह मुद्दा अब व्यापक सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले समय में पंचायतें और ग्रामीण समाज आपसी संवाद के जरिए इस पर कोई संतुलित समाधान निकालते हैं या नहीं, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।





