Traffic moves slowly as a group of stray bulls walk on a road in New Delhi May 5, 2005. An Indian court has ordered officials to clean up one of the biggest menaces prowling the wide avenues, luscious parks and crowded bazaars of the capital New Delhi - holy cows. About 35,000 cows and buffaloes roam free in Delhi in the heart of north India's Hindu "cow belt", sharing roads with hordes of monkeys, camels and stray dogs and killing scores of people every year in gorings and traffic accidents. REUTERS/Kamal Kishore KK/CCK - RTRA7NM
देहरादून: सड़कों और खेतों में घूम रहे आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए उत्तराखंड सरकार ने एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक पहल की है। पशुपालन विभाग द्वारा शुरू की गई दो नई योजनाओं के तहत अब ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा और निराश्रित पशुओं को पालने वाले लोगों को हर महीने 12 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य पशु कल्याण के साथ-साथ ग्रामीणों को अतिरिक्त और सम्मानजनक आय का साधन उपलब्ध कराना है, ताकि सार्वजनिक सुरक्षा और खेती दोनों को राहत मिल सके।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या लंबे समय से किसानों और आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। खेतों में फसलों को नुकसान और सड़कों पर दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए सरकार पर समाधान निकालने का दबाव था। इसी क्रम में पशुपालन विभाग ने दो योजनाएं शुरू की हैं, जिनका फोकस स्थानीय स्तर पर पशुओं को आश्रय और देखभाल उपलब्ध कराना है।
ग्राम गौर सेवक योजना
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश शर्मा के अनुसार पहली योजना “ग्राम गौर सेवक योजना” है। इसके अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति अधिकतम पांच नर आवारा पशुओं को अपने पास रखता है, तो उसे 80 रुपये प्रति पशु प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। इस तरह पांच पशुओं की देखभाल पर लाभार्थी को करीब 12 हजार रुपये प्रतिमाह की सहायता मिलेगी। योजना के तहत पशुओं की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और इलाज की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल जिले में छह लोग इस योजना का लाभ ले रहे हैं।
गौशाला योजना
दूसरी योजना “गौशाला योजना” के नाम से लागू की गई है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति अपने गौसदन या गौशाला में किसी भी संख्या में निराश्रित पशुओं को रख सकता है। सरकार की ओर से यहां भी 80 रुपये प्रति पशु प्रतिदिन की दर से भुगतान किया जाएगा। डॉ. योगेश शर्मा के अनुसार मुनस्यारी और बारावे क्षेत्रों में संचालित दो गौशालाओं में वर्तमान में 225 निराश्रित पशुओं को आश्रय और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि यह योजना आवारा पशुओं की समस्या के समाधान के साथ-साथ रोजगार का नया अवसर भी दे रही है। किसानों का मानना है कि इससे खेतों को नुकसान कम होगा और पशुओं को सुरक्षित ठिकाना मिलेगा। पशु प्रेमियों ने भी इसे पशु कल्याण की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है।
आगे क्या होगा
सरकार की योजना है कि आने वाले समय में इन योजनाओं का विस्तार अन्य जिलों में भी किया जाए। यदि अधिक लोग इससे जुड़ते हैं, तो आवारा पशुओं की समस्या पर स्थायी नियंत्रण संभव हो सकेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।







