
जौनसार: विकासनगर क्षेत्र के जौनसार इलाके के अस्टाड़ गांव में सेब के एक बगीचे में आग लगने से बागवान को भारी नुकसान हुआ है। चकराता-अस्टाड़ मंगरौली मोटर मार्ग के किनारे सूखी घास में लगी आग देखते ही देखते विकराल हो गई और पास के सेब बगीचे तक पहुंच गई। आग की चपेट में आकर करीब 300 सेब के पेड़ जल गए या झुलस गए। पीड़ित बागवान ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यह घटना अस्टाड़ गांव में सामने आई, जहां लंबे समय से बारिश न होने के कारण घास पूरी तरह सूख चुकी है। दिन में धूप निकलने से सूखी घास में छोटी सी चिंगारी भी आग का कारण बन रही है। ऐसे हालात में जौनसार बावर क्षेत्र में बागवानी और फसलों को लगातार नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है।
आधिकारिक जानकारी
आग की सूचना के बाद स्थानीय स्तर पर आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया। तहसील प्रशासन को घटना से अवगत करा दिया गया है, ताकि नुकसान का जायजा लिया जा सके और आगे की कार्रवाई की जा सके। आग लगने के सटीक कारणों की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
पीड़ित बागवान ब्रह्म दत्त जोशी ने बताया कि उन्होंने पिछले कई वर्षों में मेहनत कर सेब का बगीचा तैयार किया था और इस साल अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। आग की इस घटना ने पल भर में वर्षों की मेहनत को नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि आग किसी छोटी चिंगारी से लगी होगी और प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।
क्यों बढ़ रहा आग का खतरा
स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में लंबे समय से बारिश नहीं हुई है। सूखी घास और तेज हवा आग को तेजी से फैलने में मदद कर रही है। इससे बागवानी के साथ-साथ अन्य फसलें भी जोखिम में आ गई हैं। जौनसार बावर में बागवानी को बढ़ावा मिल रहा है और युवा भी इस ओर आकर्षित हो रहे हैं, लेकिन आग जैसी घटनाएं किसानों का मनोबल तोड़ रही हैं।
चकराता की जलवायु और सेब बागवानी
चकराता क्षेत्र की ठंडी जलवायु और ढलान सेब उत्पादन के लिए अनुकूल मानी जाती है। चकराता-मसूरी मार्ग पर स्थित रामताल उद्यान सहित आसपास के गांवों में सेब की सफल बागवानी हो रही है। इसी से प्रेरित होकर अस्टाड़ और आसपास के गांवों में भी सेब के बगीचे लगाए गए हैं, जिन्हें इस तरह की आगजनी से बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है।
आगे क्या होगा
प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन किए जाने के बाद मुआवजे की प्रक्रिया पर निर्णय लिया जाएगा। स्थानीय स्तर पर आग की घटनाओं को रोकने के लिए सतर्कता और सूखी घास की सफाई जैसे उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।







