
उत्तराखंड में अगले दो दिनों तक मौसम शुष्क रहने के बाद एक बार फिर बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 19 और 20 जनवरी को प्रदेशभर में मौसम साफ बना रहेगा, लेकिन 21 जनवरी से पर्वतीय जिलों में हल्की बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना है। वहीं मैदानी क्षेत्रों में कोहरा छाने और तापमान में गिरावट आने के आसार जताए गए हैं। बदलते मौसम का असर जनजीवन के साथ-साथ स्वास्थ्य और यातायात पर भी पड़ सकता है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
जनवरी के मध्य तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत सामान्य रहा है। हालांकि, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी की स्थिति बन सकती है। इससे पहाड़ों में ठंड बढ़ने के साथ-साथ ऊंचाई वाले इलाकों में आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है।
आधिकारिक जानकारी
मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार 21 जनवरी को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश होने की संभावना है। 3400 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के आसार जताए गए हैं। यह स्थिति 24 जनवरी तक बनी रह सकती है। मैदानी जिलों में कोहरा छाने से सुबह और रात के समय ठंड बढ़ने की संभावना है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से बारिश न होने के कारण ठंड तो है, लेकिन हवा में नमी की कमी महसूस की जा रही है। पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को उम्मीद है कि बर्फबारी से जल स्रोतों को लाभ मिलेगा, जबकि मैदानी क्षेत्रों में लोग प्रदूषण से राहत की उम्मीद कर रहे हैं।
बारिश न होने का असर
बारिश न होने का सीधा असर देहरादून की आबोहवा पर भी दिखाई दे रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार रविवार को दून का एयर क्वालिटी इंडेक्स 172 दर्ज किया गया, जो मध्यम से खराब श्रेणी की ओर इशारा करता है। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा वेबसाइट पर अपडेट किए गए 16 जनवरी के आंकड़ों के अनुसार, इस दिन दून का एक्यूआई 207 तक पहुंच गया था।
आंकड़े / तथ्य
19–20 जनवरी: प्रदेशभर में शुष्क मौसम
21–24 जनवरी: पर्वतीय जिलों में हल्की बारिश व बर्फबारी की संभावना
ऊंचाई: 3400 मीटर से ऊपर बर्फबारी के आसार
देहरादून एक्यूआई: 172 (रविवार)
पीएम 2.5 स्तर: 92
पीएम 10 स्तर: 110
आगे क्या होगा
यदि पूर्वानुमान के अनुसार बारिश और बर्फबारी होती है तो तापमान में और गिरावट आ सकती है। इससे मैदानी क्षेत्रों में कोहरे की तीव्रता बढ़ सकती है, जबकि पहाड़ों में यातायात और पर्यटन गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। प्रशासन और आम लोगों को मौसम को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।







