
ऋषिकेश: सयुंक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति के सदस्यों ने शनिवार को उत्तराखंड परिवहन आयुक्त से मुलाकात कर वाहनों की फिटनेस फीस में भिन्नता और एटीएस सेंटरों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। समिति ने ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि फिटनेस शुल्क की स्पष्ट जानकारी दी जाए, रसीद अनिवार्य रूप से प्रदान की जाए और एटीएस सेंटरों की मनमानी पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए। समिति का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में वाहन स्वामियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
बीते वर्ष अक्तूबर से परिवहन वाहनों की फिटनेस एटीएस सेंटरों के माध्यम से की जा रही है। समिति का दावा है कि इस व्यवस्था के लागू होने के बाद से ऑनलाइन और एटीएस फिटनेस फीस में अंतर सामने आ रहा है, जिससे वाहन स्वामियों में असमंजस और असंतोष बढ़ा है।
समिति का पक्ष
समिति अध्यक्ष भूपाल सिंह नेगी ने बताया कि एटीएस सेंटरों में जो फीस ली जा रही है, उसकी रसीद नहीं दी जाती और न ही शुल्क का विवरण सेंटर परिसर में चस्पा है। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष पुराने वाहनों की फीस हाल में कम की गई है, लेकिन अन्य मॉडलों की फीस में काफी अंतर देखने को मिल रहा है।
समिति का कहना है कि वर्ष 2011–12 के कुछ वाहनों की फिटनेस रसीद 7100 रुपये तक कट रही है, जबकि समान श्रेणी के अन्य वाहनों में शुल्क अलग-अलग लिया जा रहा है।
एटीएस सेंटरों पर उठे सवाल
समिति ने आरोप लगाया कि एटीएस सेंटरों में आरटीओ कार्यालयों की तरह शुल्क विवरण प्रदर्शित नहीं किया जाता, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। यह भी कहा गया कि तकनीकी और सक्षम अधिकारियों के बजाय निजी कंपनी के कर्मचारियों से फिटनेस कराई जा रही है।
वाहन स्वामियों की शिकायत है कि एटीएस सेंटरों पर व्यवहार संतोषजनक नहीं है और कई बार उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है। समिति ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों में वाहनों की फिटनेस के लिए एटीएस की अनिवार्यता नहीं है।
मांगें और अगला कदम
समिति ने परिवहन विभाग से एटीएस सेंटरों की मनमानी पर अंकुश लगाने, शुल्क में एकरूपता सुनिश्चित करने और अनियमितताओं को दूर करने की मांग की है। प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि परिवहन आयुक्त स्तर पर इस पर ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि वाहन स्वामियों को राहत मिल सके।
उपस्थित प्रतिनिधि
इस दौरान जीएमओयू, रूपकुंड, सीमांत सहकारी संघ और दून वैली सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिनमें महाबीर सिंह रावत, गणेश प्रसाद भट्ट, ताजवर सिंह, भगत सिंह रावत, अनिल बर्गली, कृष्णाराय और गौरव गुप्ता शामिल रहे।







