
रामनगर: वन्यजीव प्रेमियों के लिए रामनगर से अच्छी खबर सामने आई है। हर साल सर्दियों में प्रवास पर आने वाले सुर्खाब (रूडी शेलडक) पक्षियों की संख्या में इस बार उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एशियन वाटर बर्ड सेंसस 2026 के तहत कोसी नदी और विशेष रूप से कोसी बैराज क्षेत्र में की गई गणना में यह सकारात्मक रुझान सामने आया। यह सर्वेक्षण कॉर्बेट लैंडस्केप के लिए भी उत्साहजनक माना जा रहा है, क्योंकि बढ़ती संख्या पर्यावरणीय अनुकूलता और आवास सुरक्षा की ओर संकेत करती है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में एशियन वाटर बर्ड सेंसस 2026 का आयोजन 18 जनवरी 2026 को कोसी बैराज, रामनगर (नैनीताल) में किया गया। यह सिटीजन साइंस अभियान वैश्विक इंटरनेशनल वाटर बर्ड सेंसस का हिस्सा है। इस वर्ष यह 40वां एशियन और 60वां इंटरनेशनल वाटर बर्ड सेंसस था। तड़के शुरू हुई इस गणना में नदियों, झीलों और अन्य जलस्रोतों के आसपास स्थानीय व प्रवासी जलीय पक्षियों की पहचान और संख्या दर्ज की गई, ताकि संरक्षण की दिशा तय की जा सके।
आधिकारिक जानकारी
पक्षी प्रेमी एवं गणना में शामिल विशेषज्ञ दीप मलकानी ने बताया कि इस बार सुर्खाब की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। उनके अनुसार 2025 में जहां 422 सुर्खाब दर्ज किए गए थे, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 486 हो गई। हालांकि कुछ अन्य प्रवासी प्रजातियों में हल्की कमी भी देखी गई है, जो सतत मॉनिटरिंग की आवश्यकता को दर्शाती है।
रामनगर के प्रमुख आंकड़े (AWC 2025–2026)
| पक्षी प्रजाति | 2025 | 2026 |
|---|---|---|
| सुर्खाब (Ruddy Shelduck) | 422 | 486 |
| ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट | 15 | 10 |
| कॉमन सैंडपाइपर | 2 | 1 |
| कॉमन ग्रीनशैंक | 2 | 1 |
| वूली नेक्ड स्टॉर्क | 2 | 1 |
| लिटिल कार्मोरेंट | 53 | 25 |
| ग्रेट कार्मोरेंट | 36 | 40 |
| लिटिल इग्रेट | 15 | 14 |
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और पक्षी प्रेमियों का कहना है कि सुर्खाब की संख्या में इजाफा क्षेत्र के लिए राहत भरा संकेत है। इससे यह भरोसा बढ़ता है कि कोसी नदी और आसपास का पारिस्थितिकी तंत्र प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित बना हुआ है।
विशेषज्ञों की राय
इस गणना में शामिल पक्षी विशेषज्ञों में महेंद्र सिंह पंवार, हिमांशु तिरुवा, नितिन खाती, राजेंद्र कुमार और दीपक कुमार शामिल रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित गणना से यह समझने में मदद मिलती है कि किन प्रजातियों की संख्या बढ़ रही है और किन पर विशेष संरक्षण उपायों की जरूरत है।
आगे क्या होगा
गणना दोपहर तक पूरी हुई। वन विभाग और विशेषज्ञों के अनुसार, इन आंकड़ों के आधार पर आवास संरक्षण, मानव-हस्तक्षेप नियंत्रण और जोखिम वाले क्षेत्रों में सुधारात्मक कदम तय किए जाएंगे। सुर्खाब की बढ़ती संख्या से उम्मीद है कि कोसी नदी क्षेत्र भविष्य में भी प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय बना रहेगा।







