
बदरीनाथ धाम में धार्मिक मर्यादा और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए बड़ा निर्णय लिया गया है। अब सिंहद्वार से आगे मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं होगी। यह निर्देश चारधाम यात्रा 2026 की तैयारियों को लेकर ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप में हुई उच्चस्तरीय बैठक में दिए गए। बैठक में गढ़वाल आयुक्त और आईजी गढ़वाल सहित कई जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक मौजूद रहे। प्रशासन का कहना है कि रील और ब्लॉग बनाने के दौरान धार्मिक स्थलों पर बढ़ते विवादों को देखते हुए यह कदम आवश्यक था।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पिछले कुछ समय से चारधामों में रील और ब्लॉग बनाने को लेकर विवाद सामने आए हैं, जिससे धार्मिक स्थलों की मर्यादा और भीड़ प्रबंधन प्रभावित हुआ है। इन्हीं अनुभवों के आधार पर प्रशासन ने बदरीनाथ धाम में मोबाइल उपयोग को सीमित करने का निर्णय लिया है।
आधिकारिक जानकारी
ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में हुई बैठक की अध्यक्षता विनय शंकर पांडे ने की। बैठक में राजीव स्वरूप सहित पौड़ी, टिहरी, चमोली, हरिद्वार, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के डीएम व एसपी शामिल हुए। गढ़वाल आयुक्त ने चमोली जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि सिंहद्वार पर मोबाइल जमा कराने की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि दर्शन के दौरान अनुशासन बना रहे।
शीतकालीन यात्रा के आंकड़े
चारधामों के कपाट बंद होने के बाद शीतकालीन पूजा प्रवास स्थलों पर हो रही है। पर्यटन विभाग के अनुसार अब तक 27 हजार से अधिक श्रद्धालु शीतकालीन प्रवास स्थलों में दर्शन कर चुके हैं।
बाबा केदारनाथ के शीतकालीन प्रवास स्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में सबसे अधिक करीब 17 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। बदरीनाथ धाम की शीतकालीन पूजा पांडुकेश्वर और नृसिंह मंदिर, जोशीमठ में हो रही है, जहां दोनों स्थलों पर कुल 6400 श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे हैं।
यमुनोत्री धाम की शीतकालीन पूजा खरसाली में हो रही है, जहां 1017 श्रद्धालुओं ने मां यमुना के दर्शन किए। वहीं गंगोत्री धाम के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखवा में 3300 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि मोबाइल प्रतिबंध से दर्शन व्यवस्था अधिक अनुशासित होगी और धार्मिक वातावरण बना रहेगा। उनका मानना है कि इससे भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा में भी मदद मिलेगी।
आगे क्या होगा
प्रशासन द्वारा मोबाइल जमा कराने की व्यवस्था लागू की जाएगी और शीतकालीन यात्रा के प्रचार-प्रसार को और तेज किया जाएगा। सरकार का फोकस बारहमासी पर्यटन को बढ़ावा देने पर है, ताकि जो श्रद्धालु मुख्य यात्रा काल में चारधाम नहीं पहुंच पाते, वे शीतकालीन प्रवास स्थलों पर दर्शन कर सकें।







