
देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी योजनाओं के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया अब पहले से आसान होने जा रही है। लंबी और जटिल भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया से बचने के लिए राज्य सरकार लैंड परचेज पॉलिसी पर काम कर रही है, जिसे जल्द कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। इस नई नीति के तहत सरकार सीधे आम लोगों से सहमति के आधार पर जमीन खरीदेगी और उन्हें अधिक मुआवजा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे विकास योजनाओं में हो रही देरी कम होगी और परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सकेगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल, बिजली, सिंचाई और अन्य सरकारी योजनाओं के लिए जमीन की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती रही है। भूमि अधिग्रहण की मौजूदा प्रक्रिया में कानूनी औपचारिकताएं, आपत्तियां और लंबा समय लगने के कारण कई योजनाएं वर्षों तक अटकी रहती हैं।
आधिकारिक जानकारी
राजस्व विभाग की ओर से लैंड परचेज पॉलिसी को एक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में तैयार किया जा रहा है। विभाग की तैयारी है कि अगली कैबिनेट बैठक में इस नीति को मंजूरी के लिए रखा जाए। नीति लागू होने के बाद सरकार जमीन मालिकों से आपसी सहमति और बातचीत के आधार पर जमीन खरीदेगी।
मौजूदा व्यवस्था और प्रस्तावित बदलाव
वर्तमान भूमि अधिग्रहण नीति के तहत जमीन का मुआवजा सर्किल रेट से चार गुना तक दिया जाता है। वहीं लैंड परचेज पॉलिसी में सरकार जमीन मालिकों से सीधे मोलभाव करेगी, ताकि उन्हें उनकी जमीन का वास्तविक और अधिक मूल्य मिल सके। इसके लिए नीति को आकर्षक और भरोसेमंद बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
स्थानीय / मानवीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार उचित दाम और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाती है तो जमीन बेचने को लेकर विरोध की स्थिति कम होगी। किसानों और भूमिधारकों का मानना है कि सहमति से जमीन खरीदी जाने पर विवाद भी घटेंगे और विकास कार्यों में तेजी आएगी।
आगे क्या होगा
राजस्व विभाग के अनुसार कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद लैंड परचेज पॉलिसी को लागू किया जाएगा। इसके बाद विभिन्न विभाग अपनी-अपनी परियोजनाओं के लिए इसी नीति के तहत जमीन खरीद सकेंगे, जिससे सरकारी योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।




